भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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७२ गौतमधर्मसूत्राणि

जिसके ( गर्भाधान आदि ) चालीस संस्कार हुए हों ॥ ८ ॥

त्रिषु कर्मस्वभिरतः ॥ ९ ॥

इज्याध्ययनदानानि त्रीणि कर्माणि। तेष्वभिरतः। तेषां सातत्येना- नुष्ठाता। तद्वृत्तिरित्यनेनैव सिद्धे पुनर्वचनमतिदार्ढ्यार्थम् ॥ ९ ॥

( यजन, अध्ययन और दान इन ) तीन कर्मों में रत रहता हो ॥ ६ ॥

षट्सु वा ॥ १० ॥

याजनाध्यापनप्रतिग्रहैः सह षट् कर्माणि तेष्वभिरतः। वाशब्देन पूर्वोक्तेषु नियमः ॥ १० ॥

अथवा छः कर्मों ( उपर्युक्त तीन कर्मों के साथ याजन, अध्यापन और प्रतिग्रह ) में सदैव रत रहता हो ॥ १० ॥

सामयाचारिकेष्वभिविनीतः ॥ ११ ॥

पौरुषेयो व्यवस्था समयः। तन्मूला आचाराः समयाचारास्तेषु भवाः सामयाचारिकाः स्मार्ता धर्मास्तेष्वभिविनीतः पित्रादिभिः सम्यक्शि- क्षितः ॥ ११ ॥

सामयाचारिक ( स्मृति में विहित ) कर्मों में ( पिता आदि द्वारा ) सम्यक् रूप से शिक्षित किया गया हो ॥ ११ ॥

स एवंरूपो ब्राह्मणः—

षड्भिः परिहार्यो राज्ञा ॥ १२ ॥

षड्भिर्वक्ष्यमाणैर्वधादिभिः परिहार्यो राज्ञा भवति । परिहारो वर्जनम् ॥ १२ ॥

ऐसे बहुश्रुत ब्राह्मण को राजा छः प्रकार के ( वध आदि ) कष्टों से मुक्त रखे ॥ १२ ॥

तान्वधादीनाह—

अवध्यश्चावन्ध्यश्चादण्ड्यश्चाबहिष्कार्यश्चापरिवाद्यश्चा- परिहार्यश्चेति ॥ १३ ॥

वधस्ताडनम्। बन्धो निगडनम्। दण्डोऽर्थापहारः। बहिष्कारो ग्रामादिभ्यो निरसनम्। परिवादो दोषसंकीर्तनम्। परिहारस्त्यागः। षडेते वधादय एवंभूते बहुश्रुते ब्राह्मणे सत्यप्युद्धिपूर्वापराधे राज्ञा वर्ज्याः।