भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 360 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 163

९८ | गौतमधर्मसूत्राणि

( ऐसे सभी सैनिकों द्वारा सम्मिलित रूप से जीते गये धन में से अपने योग्य माणिक्यादि लेकर ) शेष धन को राजा सभी सैनिकों में उनकी योग्यता ( और पराक्रम ) के अनुसार वितरित करे ॥ २३ ॥

राज्ञो बलिदानं कर्षकैर्दशममष्टमं षष्ठं वा ॥ २४ ॥

कर्षकैः क्षेत्रे यल्लब्धं तस्य दशमभागोऽष्टमः षष्ठो वाऽंशो राज्ञो बलिदानं कररूपेण देयः । अस्य राज्ञः कर्षकैः क्षेत्रे यल्लब्धं तद्रक्षणनिमित्ता वृत्तिरेषा । कृष्टाया भूमेरतिभोगमध्यमभोगाल्पभोगविषयोऽयं व्यवस्थितो विकल्पः । अतिभोगे दशमांशो मध्यमभोगेऽष्टमांशोऽल्पभोगे षष्ठांश इति ॥ २४ ॥

कृषक खेत की उपज का दसवाँ, आठवाँ या छठा भाग राजा को कर के रूप में प्रदान करें ॥ २४ ॥

पशुहिरण्ययोरप्येके पञ्चाशद्भागः ॥ २५ ॥

ये पशुभिर्जीवन्ति ये या हिरण्यप्रयोक्तारो वार्धुषिकास्तैः पञ्चाशत्तमो भागो राज्ञे देय इत्येके । तद्यथा—यस्य पञ्चाशतपशवः सन्ति स प्रतिसंवत्सरमेकं पशुं राज्ञे दद्यात् । यस्य वा पञ्चाशन्निष्कैर्वृद्धिप्रयोगः स प्रतिसंवत्सरमेकैकं निष्कं राज्ञे बलिरूपेण दद्यादिति ॥ २५ ॥

कुछ आचार्यों का मत है कि पशुपालन से जीविका चलाने वाले और धन देकर ब्याज कमाने वाले ( प्रतिवर्ष क्रमशः पशुओं तथा मूलधन का ) पचासवाँ भाग राजा को करके रूप में प्रदान करें ॥ २५ ॥

विंशतिभागः शुल्कः पण्ये ॥ २६ ॥

यद्वणिग्भिर्विक्रीयते तत्पण्यम् । तत्र विंशतितमो भागो राज्ञे देयस्तस्यैव दीयमानस्य शुल्क इति संज्ञा । शुल्कप्रदेशाः प्रतिभाव्यं वणिक्शुल्कमित्यादयः ॥ २६ ॥

विक्रय वस्तुओं का बीसवाँ भाग ( राजा का कर होता है ) ॥ २६ ॥

मूलफलपुष्पौषधमधुमांसतृणेन्धनानां षष्ठः ॥ २७ ॥

मूलं हरिद्रादि । फलमाम्रादि । पुष्पमुत्पलादि । औषधं बिल्वादि । शिष्टानि प्रसिद्धानि । एतेषु पण्येषु षष्टि (ष्ठ) तमो भागो राज्ञे देयो विक्रेत्रा ॥ २७ ॥

हल्दी आदि मूलों, आम आदि फलों, फूल, औषध ( बिल्व आदि ), मधु, मांस, तृण और ईंधन का विक्रय करने पर छठा भाग राजा को देय होता है ॥ २७ ॥