गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished360 पृष्ठ
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सानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि १६७
दुर्वालादीञ्श्राद्ध एवैके ॥ ३१ ॥
एके तु दुर्वालानारभ्य येऽनुक्रान्तास्ताञ्श्राद्ध एव न भोजयेन्न तु दैवमानुषयोरिति मन्यन्ते । स्वमते तु ते तत्राप्यभोज्या एवेति ॥ ३१ ॥
कुछ आचार्य गंजे मनुष्य आदि पूर्वोक्त व्यक्तियों को खिलाने का निषेध केवल श्राद्ध में करते हैं। (हमारे मत से उन्हें दैव एवं मानुष कर्मों में भी नहीं खिलाना चाहिए ) ॥ ३१ ॥
अकृतान्नश्राद्धे चैवं चैवम् ॥ ३२ ॥
द्विरुक्तिः पूर्ववत् ॥ ३२ ॥
श्राद्ध में बिना पका हुआ अन्न देने पर भी उपर्युक्त नियम ही समझना चाहिए ॥ ३२ ॥
इति श्रीगौतमीयवृत्तौ हरदत्तविरचितायां मिताक्षरायां
द्वितीयप्रश्ने षष्ठोऽध्यायः ॥ ६ ॥