गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 237, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ें१७० गौतमधर्मसूत्राणि
७. वाण (एक विशेष प्रकार की वीणा), भेरी, मृदङ्ग, रथ और दुःखी व्यक्ति के विलाप का स्वर सुनाई पड़ने पर अध्ययन न करे ॥ ७ ॥
श्वशृगालगर्दभसंहादे ॥ ८ ॥
संहादः सहशब्दनम् । शुनां शृगालानां गर्दभानां संहादे नाधीयीत । त्रयाणां तु सहशब्देन दण्डापूपिकया सिद्धः प्रतिषेधः ॥ ८ ॥
अनेक कुत्ता, शृगाल और गर्दभ के एक साथ बोलने पर अध्ययन न करे ॥ ८ ॥
रोहितेन्द्रधनुर्नीहारेषु ॥ ९ ॥
आकाशे लोहिते, इन्द्रधनुषि दृश्यमाने, नीहारो हिमानी तस्यां च । तावन्तं कालं नाधीयीत ॥ ९ ॥
आकाश के लोहित वर्ण होने, इन्द्रधनुष दिखलाई पड़ने पर तथा ओस गिरते रहने के समय तक अध्ययन न करे ॥ ९ ॥
अभ्रदर्शने चापत्तौ ॥ १० ॥
अपर्तुरवर्षर्तुः । तत्र सोदकस्य मेघस्य दर्शने नाधीयीत ॥ १० ॥
वर्षाऋतु के अतिरिक्त किसी ऋतु में जलमय मेघ दिखाई पड़ने पर अध्ययन न करे ॥ १० ॥
मूत्रित उच्चारिते ॥ ११ ॥
संजातमूत्रेऽल्पे मूत्रितः । उच्चारितोऽपि तथा । तत्र श्रेयानपि नाधीयीत । उत्सर्गे तु मानसमप्यशुचिरिति वक्ष्यति ॥ ११ ॥
मूत्र या पुरीष त्याग करने की आवश्यकता का अनुभव करे तो अध्ययन न करे ॥ ११ ॥
निशायां संध्योदकेषु ॥ १२ ॥
निशा रात्रेर्मध्यमो भागस्तस्मिन्संध्यायामुदके चावस्थितो नाधीयीत ॥ १२ ॥
मध्यरात्रि को, सन्ध्या समय और जल में खड़ा होकर अध्ययन नहीं करना चाहिए ॥ १२ ॥
वर्षति च ॥ १३ ॥
वर्षति च देवे तावन्नाधीयीत । धात्वर्थमात्रं विवक्षितं न परिमाणविशेषः ॥ १३ ॥