भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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पृष्ठ 238

सानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि १७१

वृष्टि होते रहने पर भी (अध्ययन न करे) ॥ १३ ॥

एके वलीकसंतानाम् ॥ १४ ॥

एके मन्यन्ते वलीकसंतानं वलीकं नीध्रं गृहपटलान्तस्तत्र वर्षधारा संतन्द्यते यथा तथा वर्षति देवे नाध्येयम् ॥ १४ ॥

कुछ आचार्यों का मत है कि जब वर्षा की जलधारा घर की छत के किनारों (ओरी) से गिरे तब वेदाध्ययन नहीं करना चाहिए ॥ १४ ॥

आचार्यपरिवेषणे ॥ १५ ॥

आचार्यौ गुरुशुक्रौ तयोः परिवेषणे नाधीयीत। अपर आह—परिवेषणं भक्ष्यभोज्याद्यन्नोपहरणम्। ब्राह्मणानन्नेन परिवेष्येत्यादौ दर्शनात्। आचार्यस्य परिवेषणे नाधीयीतेति ॥ १५ ॥

जब बृहस्पति और शुक्र नक्षत्रों पर घेरा-सा दृष्टिगोचर होता हो तो अध्ययन न करे। (कुछ भाष्यकारों के अनुसार परिवेषण-भक्ष्य-भोज्याद्यन्नोपहरण) ॥ १५ ॥

ज्योतिषोश्च ॥ १६ ॥

प्रसिद्धज्योतिषी सूर्याचन्द्रमसौ। तयोश्च परिवेषणे नाधीयीत। पूर्वसूत्रे द्वितीयपक्षेऽत्रानुवृत्तस्य परिवेषणशब्दस्यार्थभेदोऽङ्गीकरणीयः ॥ १६ ॥

जब सूर्य और चन्द्र पर उपर्युक्त प्रकार का घेरा दिखाई पड़े तब भी अध्ययन न करे ॥ १६ ॥

भीतो यानस्थः शयानः प्रौढपादः ॥ १७ ॥

भीतो वर्तमानभयः। यानस्थोऽश्वाद्यारूढः। शयानः शय्यामासेवमानः प्रौढपादः पादे पादान्तराधायी पीठासनाद्यारोपितपादो वा। एवंभूतेन नाध्येयम् ॥ १७ ॥

भयभीत होने पर, अश्व आदि यान पर चढ़कर, सोकर और एक पैर के ऊपर दूसरा पैर रखकर अथवा आसन आदि पर पैर रखकर अध्ययन न करे ॥ १७ ॥

श्मशानग्रामान्तमहापथाशौचेषु ॥ १८ ॥

श्मशानं शवदाहस्थानम्। ग्रामान्तो ग्रामसीमा। महापथः प्रसिद्धः। अशौचं शौचराहित्यम्। एतेषु स्थानेषु नाध्येयम्। अथवाऽशौचं जननमरणनिमित्तमस्पर्शालक्षणं तस्मिन्नपि नाध्येयम् ॥ १८ ॥

श्मशान में, ग्राम की सीमा पर, महापथ में तथा अपवित्र होने पर अध्ययन न करे ॥ १८ ॥