भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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पृष्ठ 239

१७२ गौतमधर्मसूत्राणि

पूतिगन्धान्तःशवदिवाकीर्त्यशूद्रसंनिधाने ॥ १९ ॥

पूतिगन्धे घ्राणगन्धे। दिवाकीर्त्यश्चण्डालः। अन्तःशब्द उभाभ्यां संबद्धयते। अन्तःशवेऽन्तर्दिवाकीर्त्ये च ग्राम इति। शूद्रसंनिधाने[ च ] नाध्येयम्। द्वंद्वैकवद्भावः। आपस्तम्बोऽपि—अन्तःशवेऽन्तश्चण्डाल इति ॥ १९ ॥

जहाँ दुर्गन्ध हो, जिस स्थान (ग्राम) के भीतर शव या चण्डाल हो वहाँ तथा शूद्र के निकट अध्ययन न करे ॥ १९ ॥

भुक्तके चोद्गारे ॥ २० ॥

भुक्त[ क ]मम्लमम्ले चोद्गारे वर्तमाने नाधीयीत ॥ २० ॥

जब तक खट्टी डकारें आ रही हों तब तक अध्ययन नहीं करना चाहिए ॥ २० ॥

ऋग्यजुषं च सामशब्दो यावत् ॥ २१ ॥

ऋक्च यजुश्च ऋग्यजुषम्। अचतुरित्यादिना निपातः। यावत्सामशब्दः श्रूयते तावदृग्वेदं यजुर्वेदं च नाधीयीत। षष्ठ्यन्तपाठस्तु नास्मभ्यं रोचते ॥ २१ ॥

जब तक सामगान सुनाई पड़े तब तक ऋग्वेद और यजुर्वेद का अध्ययन न करे ॥ २१ ॥

आकालिका निर्घातभूमिकम्पराहुदर्शनोल्काः ॥ २२ ॥

निर्घातोऽशनिपातः। भूमिकम्पो भूचलनम्। राहुदर्शनं ग्रहणम्। उल्कोल्कापातः। एत आकालिका अनध्यायहेतव इति प्रकरणाद्गम्यते। यस्मिन्काल एते भवन्ति परेद्युस्तत्पर्यन्तं काल आकालः। तत्संबद्ध आकालिकः ॥ २२ ॥

वज्रपात होने पर, भूकम्प होने पर, राहु के दिखलाई पड़ने पर एवं उल्कापात होने पर दूसरे दिन के उसी समय तक अनध्याय रहता है ॥ २२ ॥

स्तनयित्नुवर्षविद्युतश्च प्रादुष्कृताग्निषु ॥ २३ ॥

स्तनयित्नुर्मेघशब्दः। प्रसिद्धमन्यत्। प्रादुष्कृतेष्वग्निहोत्रहोमकाले संध्यायां स्तनयित्नुप्रभृतयो भवन्तः प्रत्येकमाकालिकानध्यायहेतवः। अपर्त्ताविदम् ॥ २३ ॥

सन्ध्याकाल में अग्निहोत्र के काल में मेघगर्जन, वृष्टि या विद्युत् की चमक होने पर अध्ययन न करे ॥ २३ ॥