गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 240, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ेंसानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि १७३
ऋतावाह —
अहर्ऋतौ ॥ २४ ॥
वर्षर्त्तावेते यदि भवेयुः संध्यायां तदा प्रातश्चेदहर्मात्रमनध्यायः । सायं तु रात्रावनध्याय इत्यर्थसिद्धत्वादनुक्तम् ॥ २४ ॥
यदि उपर्युक्त घटनाएँ वर्षा ऋतु में प्रातः काल हों तो दिन भर का अनध्याय होता है (सायंकाल होने पर रात्रि को अनध्याय होता ही है) ॥ २४ ॥
विद्युति नक्तं चाऽऽपररात्रात् ॥ २५ ॥
यदि नक्तं विद्युद् दृश्यते न संध्यायां तदाऽऽपररात्राद्रात्रेस्तृतीयो भागोऽपररात्र आ तस्मादनध्यायः । ततोऽध्येयम् । प्रातस्तु संध्यायां विद्युति जाबाल आह—विद्युति प्रातरहरनध्याय इति ॥ २५ ॥
यदि रात्रि में विद्युत् चमकती दिखाई पड़े तो रात्रि के तीसरे भाग तक अनध्याय होता है ॥ २५ ॥
त्रिभागादिप्रवृत्तौ सर्वम् ॥ २६ ॥
यद्यहस्तृतीयाद्भागादारभ्य विद्युत्प्रवर्तते न केवलायां संध्यायां नापि नक्तं तदा सर्वरात्रमनध्यायः ॥ २६ ॥
यदि दिन के तीसरे पहरे से लेकर विद्युत् चमकती रहे, तो सारी रात अनध्याय रहता है ॥ २६ ॥
उल्का विद्युत्समेत्येकेषाम् ॥ २७ ॥
उल्का च विद्युत्तुल्या । यथा विद्युत्यनध्यायो विद्युति नक्तं चापररात्रादित्येवमुल्कापातेऽपीत्येकेषां मतम् ॥ २७ ॥
कुछ आचार्यों का मत है कि उल्कापात होने पर भी विद्युत् दर्शन के समान ही (रात्रि के तीसरे भाग तक अनध्याय होता है) ॥ २७ ॥
स्तनयित्नुरपराह्ने ॥ २८ ॥
स्तनयित्नुरपराह्ने यदि भवति न संध्यायां तदा विद्युत्समो भवति । आऽपररात्रादनध्यायं करोति ॥ २८ ॥
अपराह्न में मेघों का गर्जन होने पर (विद्युत् दर्शन के समान ही रात्रि के तीसरे भाग तक अनध्याय होता है) ॥ २८ ॥
अपि प्रदोषे ॥ २६ ॥
प्रदोषेऽपि भवः स्तनयित्नुर्विद्युत्समः । आऽपररात्रादनध्यायहेतुः ॥२९॥