गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 241, कुल 360 में से
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प्रदोष काल में भी मेघगर्जन होने पर (विद्युत् दर्शन के समान ही रात्रि के तीसरे भाग तक अनध्याय रहता है) ॥ २९ ॥
सर्वं नक्तमार्द्धरात्रात् ॥ ३० ॥
प्रथमाद्रात्रिभागादारभ्याऽर्धरात्रात्प्रवृत्तः स्तनयित्नुः सर्वं नक्तमनध्यायहेतुः ॥ ३० ॥
रात्रि के आरम्भ से लेकर आधीरात तक के समय में मेघगर्जन होने पर सारी रात अनध्याय होता है ॥ ३० ॥
अहश्चेत्सज्योतिः ॥ ३१ ॥
अहश्चेत्स्तनयित्नुर्भवति। प्रागपराह्नात्तदा सज्योतिरनध्यायः। सकलं दिवसमित्यर्थः ॥ ३१ ॥
यदि (अपराह्न से पहले) दिन में मेघगर्जन हो तो सूर्य का प्रकाश रहने तक अर्थात् दिन भर अनध्याय होता है ॥ ३१ ॥
विषयस्थे च राज्ञि प्रेते ॥ ३२ ॥
यस्मिन्विषये ऽयं वसति तत्रस्थे तस्याधिपतौ राज्ञि प्रेते सज्योतिरनध्यायः। आकालिकमित्यन्ये ॥ ३२ ॥
जिस स्थान पर निवास किया जा रहा हो वहाँ के अधिपति राजा की मृत्यु होने पर दिन भर अनध्याय होता है ॥ ३२ ॥
विप्रोष्य चान्योन्येन सह ॥ ३३ ॥
यदा सहाध्यायिनः परस्परं विप्रवसेयुः केचिच्चाऽऽचार्येण संगतास्तदा सज्योतिरनध्यायः। आ परेषां मेलनादित्येके। आकालिकमित्यन्ये ॥ ३३ ॥
यदि एक साथ अध्ययन करने वालों में कोई शिष्य बाहर गया हो और अन्य गुरु के साथ हों तो गये हुए शिष्य के वापस लौटकर आने तक अनध्याय रहता है ॥ ३३ ॥
संकुलोपाहितवेदसमाप्तिच्छर्द्दिश्राद्धमनुष्ययज्ञभोजनेष्वहोरात्रम् ॥ ३४ ॥
संकुलश्चोरादिभिर्ग्रामाद्युपद्रवः। उपाहितोऽग्निदादः। वेदसमाप्तिः शाखासमाप्तिः। छर्दनं भुक्तोद्गारः। श्राद्धमेकोद्दिष्टादि। मनुष्ययज्ञो वसन्तोत्सवादिः। भोजनशब्द उभाभ्यां संबध्यते। श्राद्धभोजने मनुष्ययज्ञभोजन इति। एतेषु निमित्तेष्वहोरात्रमनध्यायः। मनुष्यप्रकृतीनां