भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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सानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि १७५

देवानां यज्ञो मनुष्ययज्ञ इत्यन्ये । यथाऽऽहाऽऽपस्तम्बः—मनुष्यप्रकृतीनां देवानां यज्ञे भुक्त्वेत्येक इति । ये मनुष्या भूत्वा प्रकृष्टेन तपसा देवाः संपन्नास्तद्यज्ञस्तत्प्रीत्यर्थं ब्राह्मणभोजनम् ॥ ३४ ॥

गाँव में चोरों आदि का उपद्रव होने पर, आग लग जाने पर, एक वेद का अध्ययन पूरा होने पर, कै होने पर, श्राद्ध का भोजन करने पर तथा मनुष्ययज्ञ में भोजन करने पर एक दिन और रात अनध्याय होता है ॥ ३४ ॥

अमावास्यायां च ॥ ३५ ॥

अमावास्यायामहोरात्रमनध्यायः ॥ ३५ ॥

अमावस्या को दिन और रात्रि में अनध्याय होता है ॥ ३५ ॥

द्वयहं वा ॥ ३६ ॥

तदहः पूर्वेद्युश्च द्वयहमनध्यायः । शुक्लचतुर्दश्यां त्वनध्यायस्य मूलान्तरं मृग्यम् । एवं प्रतिपत्सु च ॥ ३६ ॥

अथवा दो दिन (अमावस्या का दिन तथा उसके पहले के दिन) अनध्याय रहता है ॥ ३६ ॥

कार्तिकी फाल्गुन्याषाढी पौर्णमासी ॥ ३७ ॥

कार्तिक्याद्यास्तिस्रः पौर्णमास्योऽनध्यायहेतवोऽहोरात्रम् । पौर्णमास्यन्तरेष्वनध्याये मूलं मृग्यम् ॥ ३७ ॥

कार्तिक, फाल्गुन, और आषाढ़ मासों की पौर्णमासी को दिन-रात्रि का अनध्याय रहता है ॥ ३७ ॥

तिस्रोऽष्टकास्त्रिरात्रम् ॥ ३८ ॥

ऊर्ध्वमाग्रहायण्यास्त्रिष्वपरपक्षेषु तिस्रोऽष्टकाः । तास्त्रिरात्रमनध्यायहेतवः तदहः पूर्वेद्युरपरेद्युश्च ॥ ३८ ॥

आग्रहायणी आदि तीन अष्टका तिथियों को भी तीन दिन रात्रि का अनध्याय होता है ॥ ३८ ॥

अन्त्यामेके ॥ ३९ ॥

एकेऽन्त्यामेकाष्टकामनध्यायहेतुं मन्यन्ते ॥ ३९ ॥

कुछ आचार्यों का मत है कि केवल अन्तिम अष्टका के अवसर पर अनध्याय होता है ॥ ३९ ॥