गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 256, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ेंसानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि १८९
जिन पशुओं को भक्ष्य बताया गया है (वे न केवल मरने पर, दूसरों द्वारा मारे जाने पर भक्ष्य होते हैं अपितु) वे धर्म के लिए (अतिथि-सत्कार आदि में) मारे भी जा सकते हैं॥ ३७॥
व्यालहतादृष्टदोषवाक्प्रशस्तानभ्युक्ष्योपयुञ्जीतोपयुञ्जीत ॥३८॥
अतिथीनप्याशयेद्भक्षयेच्च । न तु श्वादेरुच्छिष्टमिति वर्जयेत् । मनुरप्याह–श्वा मृगग्रहणे शुचिरिति । द्विरुक्तिरुक्ता । अत्र मनुः—
अनुमन्ता विशसिता निहन्ता क्रयविक्रयी ।
संस्कर्ता चोपहर्ता च खादकश्चेति घातकाः ॥
न मांसभक्षणे दोषो न मद्ये न च मैथुने ।
प्रवृत्तिरेषा भूतानां निवृत्तिस्तु महाफलम् ॥ इति ।
अप्रतिषिद्धेष्वपि भक्ष्यान्निवृत्तिरेव ज्यायसीत्यर्थः ॥ ३८ ॥
किसी शिकार करने वाले पशु द्वारा मारे गये पशु-पक्षी को, यदि उसमें कोई दोष न हो और ब्राह्मण के वचन के अनुसार वह भोज्य हो तो उसे धोकर खाया जा सकता है ॥ ३८ ॥
इति श्रीगौतमयोवृत्तौ हरदत्तविरचितायां मिताक्षरायां द्वितीयप्रश्नेऽष्टमोऽध्यायः ॥ ८ ॥