गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)
Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary
महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा
DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ
पृष्ठ 212, कुल 448 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 212
१८० श्रीगीतगोविन्दम् श्रीकृष्णके वैदग्ध्य, माधुर्य एवं सौन्दर्य आदिका अवलोकन करके चुम्बन करनेवाली इन गोपियोंका ललाट-स्थित सिन्दूर और लाल-लाल ओंठोंकी लालिमा भी उन भुजाओंमें चिह्नित हो गई थी। इस प्रकार अपने इस सौभाग्यमदसे अङ्कित श्रीकृष्णकी भुजाएँ सबका कल्याण करें। स्निग्ध मधुसूदन—इस प्रकार श्रीराधाकी विकलताका श्रवणकर श्रीकृष्ण स्निग्ध-चेष्टाशून्य हो गये। श्रीगीतगाविन्द महाकाव्यमें स्निग्ध-मधुसूदन नामक चतुर्थ सर्गकी बालबोधिनी व्याख्या समाप्त।