भारतकोश
गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary

महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 448 में से

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प्रस्तावना [थ] सौभाग्यवती वृन्दादेवीने मेरे साथ रहकर बड़े परिश्रमसे इस ग्रन्थका प्रूफ-संशोधन किया है। मैं श्रीजयदेव गोस्वामी तथा उनकी परमाराध्या श्रीराधिका एवं ब्रजेन्द्रनन्दन श्रीश्यामसुन्दरके चरणोंमें प्रार्थना करता हूँ कि वे उनपर अहैतुकी कृपा करें, जिससे वे इस प्रसिद्ध काव्यके यथार्थतः अधिकारी बन सकें। शीघ्रतासे इसका प्रकाशन होनेके कारण कुछेक त्रुटियाँ रह गई हैं। कृपालु सहृदय पाठकगण इन त्रुटियोंका संशोधन कर इसके भावार्थको ग्रहण करेंगे और पत्रके माध्यमसे मुझे सूचित करेंगे, जिसका मैं अगले संस्करणमें संशोधन कर सकूँ। फाल्गुन पूर्णिमा श्रीहरि-गुरु-वैष्णव कृपालेश प्रार्थी ५१७ श्रीगौराब्द दीनहीन भारतीयाब्द १९२४, त्रिदण्डिभिक्षु श्रीभक्तिवेदान्त नारायण १८ मार्च २००३ ई.

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