गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)
Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary
महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा
DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ
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२०८ श्रीगीतगोविन्दम् नामक अलंकारोंका समावेश है। शार्दूलविक्रीड़ित छन्द तथा पाञ्चाली रीति है। इस प्रकार श्रीजयदेव प्रणीत गीतगोविन्द काव्यके अभिसारिका वर्णनमें 'साकांक्षपुण्डरीकाक्ष' नामक पाँचवाँ सर्ग पूर्ण हुआ। श्रीराधाके आगमनकी प्रतीक्षामें पुण्डरीकाक्ष विराजमान हैं—ऐसा यह पाँचवाँ सर्ग सबके प्रति आनन्ददायी हो। इति गीतिगोविन्द महाकाव्ये एकादश सन्दर्भे टीकायां बालबोधिनी वृत्ति।