भारतकोश
गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary

महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ

पृष्ठ 406, कुल 448 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 406

३७४ श्रीगीतगोविन्दम् सरोवरमें कमल विकसित होते हैं, उसी प्रकार श्रीराधाके वक्षःस्थल-तड़ागमें दोनों स्तन ही मनोहर कमल हैं, जहाँ श्रीकृष्ण क्रीड़ा करनेवाले राजहंस हैं। ऐसे राजहंस श्रीकृष्णका जो लोग ध्यान करते हैं, उन ध्यान करनेवाले ध्याताओंके हृदय-स्थलमें विहार करनेवाले मानसरोवरके राजहंसके समान श्रीकृष्ण अपने सभी भक्तोंका मंगल विधान करें। प्रस्तुत श्लोकमें रूपक एवं आशीः अलंकार है और शार्दूलविक्रीड़ित छन्द है। इस प्रकार सामोददामोदर नामक ग्यारहवें सर्गकी समाप्ति हुई।