भारतकोश
गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary

महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ

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४८ श्रीगीतगोविन्दम् अनुवाद—हे भगवन्! हम आपके चरणोंमें शरणागत हैं। आप प्रेमभक्ति प्रदानकर अपने प्रति प्रणतजनोंका कुशल विधान करें। हे देव! हे हरे! आपकी जय हो! जय हो॥८॥ पद्यानुवाद— तव चरणोंमें हम नत हे। करो कुशल अखिलेश! जय जय देव हरे॥ बालबोधिनी—प्रस्तुत पद्यमें कवि अपने श्रोताओं और वक्ताओंके कल्याणके लिए श्रीकृष्णके अनुग्रहकी प्रार्थना कर रहे हैं। हे कल्याण गुणाकर! हम आपके चरणोंमें प्रणत हैं। अतएव आप हम शरणागतोंका कल्याण करें। भक्तोंके पाप और तापका विनाश करें। आप परमानन्दस्वरूप हैं, वैसे ही आपकी लीला परमानन्दस्वरूप है, आप इन लीलाओंको हमारे हृदयमें स्फूर्तिप्राप्त करवाकर हम सबका आनन्दवर्द्धन करें ॥८॥ श्रीजयदेवकवेरिदं कुरुते मुदम्। मङ्गलमुज्ज्वलगीतम्, जय जय देव हरे॥९॥ अन्वय—श्रीजयदेवकवेः इदम् उज्ज्वलगीतं (उज्ज्वलं यथा तथा गीतं) मङ्गलं (माङ्गलिकं वचनम् अथवा मङ्गलाचरणमात्रं कर्त्तृ) मुदं (हर्षं) कुरुते (जनयति; तव भक्तानां चेतसीति शेषः) हे देव हरे त्वं जय जय॥९॥ अनुवाद—श्रीजयदेव कवि प्रणीत यह मनोहर, उज्ज्वल गीतिमय मङ्गलाचरण आपका आनन्द वर्द्धन करें अथवा आपके गुणोंके श्रवण कीर्त्तन करनेवाले भक्तजनोंको आनन्द प्रदान करें। आपकी जय हो! जय हो॥९॥ पद्यानुवाद— श्रीजयदेव लिखित यह सुन्दर। मङ्गल उज्ज्वल गीत जय जय देव हरे॥

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