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गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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६७ बालकाण्ड उनके मस्तकोंपर शोभायमान है, गलेमें यज्ञोपवीत है, अङ्गमें पीताम्बर सुशोभित है, हाथमें धनुष-बाण हैं तथा कमरमें तरकस कसा हुआ है, मानो यज्ञके रोगरूप राक्षसोंका नाश करनेके लिये सूर्यदेवने अग्निके साथ अपने पुत्र दोनों अश्विनीकुमारोंको भेजा हो ॥ २ ॥ बादल छाया कर रहे हैं, देवतालोग फूल बरसाते हैं तथा उनकी छबिको कामदेवसे भी अतुलित बतलाते हैं। तुलसीदासजी कहते हैं, प्रभुको देखकर मार्गके मनुष्य, पक्षी और मृग भगवान्‌के रूप-रंगमें रँगकर प्रेममें मग्न हो रहे हैं ॥ ३ ॥ राग कल्याण [ ५४ ] मुनिके संग बिराजत बीर । कालपच्छ धर, कर कोदंड-सर, सुभग पीतपट कटि कटि तूनीर ॥ १ ॥ बदन इंदु, अंभोरुह लोचन, स्याम गौर सोभा-सदन सरीर । पुलकत ऋषि अवलोकि अमित छबि, उर न समाति प्रेमकी भीर ॥ २ ॥ खेलत, चलत, करत मग कौतुक, बिलंबत सरित-सरोबर-तीर । तोरत लता, सुमन, सरसीरुह, पियत सुबासम सीतल नीर ॥ ३ ॥ बैठत बिमल सिलनि बिटपनि तर, पुनि पुनि बरनत छाँह, समीर । देखत नटत केकि, कल गावत मधुप, मराल, कोकिला, कीर ॥ ४ ॥ गी० ७-

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