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गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 107, कुल 454 में से

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पृष्ठ 107

१०१ बालकाण्ड नाम-रूप-अनुरूप बेष बय, राम लखन लाल लोने। इन्ह तें लही है मानो घन-दामिनि दुति मनसिज, मरकत, सोने ॥ २ ॥ चरनसरोज, पीतपट, कटितट, तून-तीर-धनुधारी। केहरिकंध काम-करि-करवर बिपुल बाहु, बल भारी ॥ ३ ॥ दूषन-रहित समय सम भूषन पाइ सुअंगनि सोहैं। नव-राजीव-नयन पूरन बिधुबदन मदन मन मोहैं ॥ ४ ॥ सिरनि सिखंड, सुमन, दल-मंडन बाल सुभाय बनाये। केलि-अंक तनु-रेनुपंक जनु प्रगटत चरित चोराये ॥ ५ ॥ मख राखिबे लागि दसरथ सों माँगि आश्रमहि आने। प्रेम पूजि पाहुने प्रानप्रिय गाधिसुवन सनमाने ॥ ६ ॥ साधन-फल साधक सिद्धिनिके, लोचन-फल सबहीके। सकल सुकृत-फल, मातु-पिताके, जीवन-धन तुलसीके ॥ ७ ॥ दोनों राजकुमार अति सुन्दर और मङ्गलमय हैं। मुनिजन, मुनिपत्नियाँ और मुनिकुमार उन्हें देखकर कहते हैं—यह जोड़ी बड़ी मधुर और मनोहर है ॥ १ ॥ राम और लक्ष्मण—ये दोनों भाई अपने नाम और रूपके अनुरूप वेष और अवस्थामें भी बड़े सुन्दर हैं, मानो इन्हींसे मेघ और विद्युत्, कामदेव तथा मरकतमणि और सुवर्णने भी कान्ति पायी है ॥ २ ॥ इनके चरण कमलके समान हैं, कटिप्रदेशमें पीत वस्त्र हैं तथा ये तरकस, धनुष और बाण धारण करनेवाले हैं। इनके कन्धे सिंहके समान हैं तथा भुजाएँ कामदेवके हाथीकी सूँड़के समान सुन्दर एवं बड़ी तथा बलशालिनी हैं ॥ ३ ॥ इनके निर्दोष और समयानुकूल भूषण सुन्दर अंगोंको पाकर शोभायमान हो रहे हैं तथा नवीन कमलके समान नेत्र और पूर्णचन्द्रसदृश मुख कामदेवके मनको मोहे लेते हैं ॥ ४ ॥ इन्होंने बालस्वभावसे

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