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गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 114, कुल 454 में से

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पृष्ठ 114

गीतावली १०८ तिरछी चितवनसे देखते हुए लड़कोंसे हँसकर पूछते हैं 'शिवजीका धनुष कहाँ है ?' तुलसीदासजी कहते हैं, गलियोंमें भीड़ हुई देखकर लोग प्रभुका दर्शन करनेके लिये अटारियोंपर चढ़े हुए हैं ॥ ४ ॥ [ ६३ ] ये अवधेसके सुत दोऊ । चढ़ि मंदिरनि बिलोकत सादर जनकनगर सब कोऊ ॥ १ ॥ स्याम गौर सुंदर किसोर तनु, तून-बान-धनुधारी । कटि पट पीत, कंठ मुकुतामनि, भुज बिसाल, बल भारी ॥ २ ॥ मुख मयंक, सरसीरुह लोचन, तिलक भाल, टेढ़ी भौंहें । कल कुंडल, चौतनी चारु अति, चलत मत्त-गज-गौंहें ॥ ३ ॥ बिस्वामित्र हेतु पठये नृप, इन्हिं ताडुका मारी । मख राख्यो रिपु जीति, जान जग, मग मुनिबधू उधारी ॥ ४ ॥ प्रिय पाहुने जानि नर-नारिन नयननि अयन दये । तुलसीदास प्रभु देखि लोग सब जनक समान भये ॥ ५ ॥ जनकपुरीके सभी लोग अपने घरोंपर चढ़कर आदरपूर्वक देखते हैं और कहते हैं कि ये दोनों अवधपति महाराज दशरथके पुत्र हैं ॥ १ ॥ इनका अति सुन्दर श्याम-गौर शरीर है, किशोर अवस्था है तथा ये धनुष-बाण एवं तरकस धारण किये हुए हैं । इनकी कमरमें पीताम्बर है। कण्ठमें मोती और मणियोंकी माला है तथा इनकी विशाल भुजाएँ अत्यन्त बलशालिनी हैं ॥ २ ॥ इनका मुख चन्द्रमाके समान है, नेत्र कमलसदृश हैं, माथेपर तिलक शोभायमान है तथा तिरछी भौंहें हैं। इनके कानोंमें मनोहर कुण्डल और सिरपर अति सुन्दर चौतनी टोपी है । ये मत्त गजराजकी गतिसे चल रहे हैं ॥ ३ ॥ महाराजने इन्हें विश्वामित्रजीकी यज्ञरक्षाके लिये भेजा था।

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