गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२५ बालकाण्ड समान और कुछ कुमुद एवं चकोरवत् जान पड़ते हैं, मैले हो रहे हैं ॥ ५ ॥ भगवान् राम जब भाईसे बातें करते हैं तो विश्वामित्रजीसे सकुचाकर और मेघके समान गम्भीर शब्द बोलते हैं तथा अधिक नहीं बोलते । प्रभु सभीके सम्मुख [अनुकूल] हैं, सभीको अच्छी दृष्टिसे देखते हैं तथा तुलसीदासकी ओर भी कृपापूर्वक हँसकर देख रहे हैं ॥ ६ ॥ [ ७४ ] एई राम-लषन जे मुनि-सँग आये हैं । चौतनी-चोलना काछे, सखि ! सोहैं आगे-पाछे, आछे हुँते आछे, आछे आछे भाय भाये हैं ॥ १ ॥ सांवरे गोरे सरीर, महाबाहु, महाबीर, कटि तून तीर धरे, धनुष सुहाये हैं । देखत कोमल, कल अतुल बिपुल बल, कौसिक कोदंड-कला कलित सिखाये हैं ॥ २ ॥ इन्हहीं ताड़का मारी, गौतमकी तिय तारी, भारी भारी भूरि भट रन बिचलाये हैं । ऋषि-मख रखवारे, दसरथके दुलारे रंग-भूमि पगु धारे, जनक बुलाये हैं ॥ ३ ॥ इन्हके बिमल गुन गनत पुलकि तनु सतानंद-कौसिक नरेसहि सुनाये हैं। प्रभुपद मन दिये, सो समाज चित्त किये हुलसि हुलसि हिये तुलसिहुँ गाये हैं ॥ ४ ॥ [पुर-नारियाँ कहती हैं—] 'जो विश्वामित्र मुनिके साथ आये हैं वे राम लक्ष्मण ये ही हैं। सखि ! देखो, ये चौतनी टोपी और