भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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१३५ बालकाण्ड भूपतिकिसोर दुहुँ ओर, बीच मुनिराउ, देखिबेको दाउँ, देखौ देखिबो बिहाइकै । उदय-सैल सोहैं सुंदर कुँवर जोहैं, मानो भानु भोर भूरि किरनि छिपाइकै ॥ ४ ॥ कौतुक कोलाहल निसान-गान पुर, नभ बरषत सुमन बिमान रहे छाइकै । हित-अनहित, रत-बिरत बिलोकि बाल, प्रेम-मोद-मगन जनम-फल पाइकै ॥ ५ ॥ राजाकी रजाइ पाइ सचिव-सहेली धाइ, सतानंद ल्याए सिय सिबिका चढ़ाइकै । रूप-दीपिका निहारि मृग-मृगी नर-नारि, बिथके बिलोचन-निमेषै बिसराइकै ॥ ६ ॥ हानि, लाहु, अनख, उछाहू, बाहुबल कहि बंदि बोले बिरद अकस उपजाइकै । दीप दीपके महीप आपु सुनि पैज पन, कीजै पुरुषारथको अवसर भौ आइकै ॥ ७ ॥ आनाकानी, कंठ-हँसी मुँहा-चाही होन लगी, देखि दसा कहत बिदेह बिलखाइकै । घरनि सिधारिए, सुधारिए आगिलो काज, पूजि पूजि धनु कीजै बिजय बजाइकै ॥ ८ ॥ जनक-बचन छुए बिरवा लजारु के से बीर रहे सकल सकुचि सिर नाइकै । तुलसी लखन माषे, रोषे, राखे रामरुख, भाषे मृदु परुष सुभायन रिसाइकै ॥ ६ ॥