भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 165

१५६ बालकाण्ड विवाह करके तो इनका जीवन ही सफल हो गया है। इस समय तीनों लोकोंमें इनकी बड़ाई प्रकट हो गयी है ॥ २ ॥ अहा ! अब ये राम-लक्ष्मण दोनों भाई बारम्बार पाहुने होकर आया करेंगे।' इस प्रकार आनन्दमें मग्न होकर पुरवासियोंने अपने देहकी सुधि भुला दी ॥ ३ ॥ सब लोग आदरपूर्वक रामचन्द्रजीको देख रहे हैं, जिनपर करोड़ों कामदेवोंकी छवि छायी हुई है। उस सुख, समय और समाजका तुलसीदास एक ही मुखसे कैसे बखान कर सकता है ? ॥ ४ ॥ विवाहकी तैयारी राग सोरठ [ ९९ ] मेरे बालक कैसे धौं मग निबहहिंगे ? भूख, पियास, सीत, श्रम सकुचनि क्यों कौसिकहि कहहिंगे ॥ १ ॥ को भोर ही उबटि अन्हवैहै, काढ़ि कलेऊ दैहै ? को भूषन पहिराइ, निछावरि करि लोचन-सुख लैहै ? ॥ २ ॥ नयन निमेषनि ज्यों जोगवैं नित पितु-परिजन-महतारी । ते पठए ऋषि साथ निसाचर मारन, मख रखवारी ॥ ३ ॥ सुंदर सुठि सुकुमार सुकोमल, काकपच्छ-धर दोऊ । तुलसी निरखि हरषि उर लैहौं बिधि ह्वै है दिन सोऊ ? ॥ ४ ॥ [ इधर कौसल्याजी चिन्ता कर रही हैं— ] 'मेरे बालक किस प्रकार मार्गमें निर्वाह करेंगे ? वे संकोचवश अपनी भूख, प्यास, शीत और श्रम आदिके विषयमें विश्वामित्रजीसे भी क्यों कहेंगे ? ॥ १ ॥ उन्हें प्रातःकाल होते ही उबटन मलकर कौन स्नान करावेगा, कौन