भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 169

१६३ बालकाण्ड कहो कुछ समाचार मिला क्या ?' ॥ २ ॥ [ भरतजीने कहा— ] 'माता ! तिरहुतराज जनकजाने अपने पुरोहित शतानन्दजीको भेजा है; वे राम-लक्ष्मणके कुशल-क्षेमकी सुन्दर पत्रिका लाये हैं ॥ ३ ॥ उन्होंने ताड़काका दमन और राक्षसोंका संहार कर विश्वामित्रजीके यज्ञकी रक्षा की और फिर मुनिपत्नी (अहल्या) का उद्धार किया। तदनन्तर विश्वामित्रजी उन्हें विद्या पढ़ाकर जनकपुर ले गये; वहाँ वे गुरुजीके साथ आनन्दपूर्वक हैं ॥ ४ ॥ जनकजीने पिनाक ( चढ़ाने ) का प्रण करके, अपनी पुत्रीके स्वयंवरका साज सजाकर बहुत-से राजाओंको एकत्र किया था। उस राजसभामें रघुनाथजीने वह धनुष कमलनालके समान तोड़ डाला' ॥ ५ ॥ ऐसा कहकर दोनों भाई स्नेहसे शिथिल हो गये। तब माताने उन्हें गोदमें उठा लिया और बारम्बार मुख चूमकर मनोहर मणि और वस्त्रादि निछावर किये ॥ ६ ॥ तुलसीदासजी कहते हैं, इस सुहावनी मनोकामनाका समाचार सुनते ही अयोध्यामें घर-घर आनन्दमयी बधाई बजने लगी और रनिवासमें भी सखियोंने आनन्दवश मङ्गलगान आरम्भ कर दिया ॥ ७ ॥ राग कान्हरा [ १०३ ] राम-लषन सुधि आई, बाजै अवध बाधई । ललित लगन लिखि पत्रिका, उपरोहितके कर जनक-जनेस पठाई ॥ १ ॥ कन्या भूप बिदेहकी रूपकी अधिकाई, तासु स्वयंबर सुनि सब आई देस देसके नृप चतुरंग बनाई ॥ २ ॥