भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 30, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 30

गीतावली २४ अपने-अपने रंगमें भरकर नृत्य कर रहे हैं, मानो कामदेव और रति तरह-तरहके रूप धारणकर सुन्दर ढंगसे सुन्दर नाच नाच रहे हों ॥१४॥ नाना प्रकारके छन्द, प्रबन्ध, गीत, पद, राग और तानके क्रमोंका उद्‌घाटन हो रहा है, जिसे सुनकर गन्धर्व और किन्नरगण प्रशंसा कर रहे हैं तथा देवताओंके विमान भी थकित हो रहे हैं ॥१५॥ केसर, अगर और अरगजा छिड़कते हैं तथा गुलाल और अबीर लगाते हैं, आकाशसे फूलोंकी झड़ी लगी है तथा नगरमें बड़ा कोलाहल और सुन्दर भीड़ हो रही है ॥१६॥ महाराज दशरथको गुरु और देवताओंके आशीर्वादसे वृद्धावस्थामें विधाता अनुकूल हुआ है। इस समय दशरथजीके सम्पूर्ण सुकृतरूप अमृतसमुद्र अपनी मर्यादा छोड़कर उमड़ आये हैं ॥१७॥ ब्राह्मणलोग वेदध्वनि तथा बन्दीलोग विरदावली, जयघोष और मङ्गलगान कर रहे हैं। अतः कामकाजी लोग बाहर-भीतर आते-जाते समय [कोलाहलके कारण एक दूसरेका शब्द न सुन सकनेसे] आपसमें कानसे लगकर बात- चीत करते हैं ॥१८॥ राजमहिषी और नगरकी नारियाँ समान- भावसे मोती और रत्न आदि निछावर कर रही हैं। सारे नगरमें निछावर किये गये मणिगण बिखरे हुए हैं, मानो ज्वार, जौ और धान बिखरे पड़े हैं ॥१९॥ महाराजने परम आनन्दित होकर राजभवनमें सब प्रकारकी वैदिक और लौकिक रीति की है। इस समय कौसल्या, कैकेयी और सुमित्रा तथा सारा रनिवास अति हर्षित हो रहा है ॥२०॥ रानियोंने वस्त्र, मणि और आभूषणादि दिये हैं तथा राजाने [रुपया, अशरफी आदि] बाहरी कोष दान किया है। उन्हें लेकर मागध, सूत, भाट, नट और याचकलोग आपसमें जहाँ