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गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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२५ बालकाण्ड

तहाँ लेन-देन कर रहे हैं ॥२१॥ महाराजने विप्रवधू और सुवासिनियों- (पितृगृहमें रहनेवाली विवाहिता लड़कियों) का सम्मान कर अपने आश्रित और पुरवासियोंको वस्त्रादि पहनाकर सम्मानित किया है। अतः वे सब लोग महादेव और विष्णुभगवान्‌को मनाते हुए उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं ॥२२॥ इस समय आठों सिद्धियाँ, नवों निधियाँ और सब प्रकारकी विभूतियाँ महाराजके महलमें टहल कर रही हैं। महाराज दशरथके इस समय और समाजको देखकर सभी लोकपाल सिहा रहे हैं ॥२३॥ अवधवासियोंके इस समयके प्रेम, प्रमोद और उत्साहका वर्णन कौन कर सकता है ? वह शारदा, शेष, गणेश और भगवान् शङ्करकी भी पहुँचके बाहर है और वेद भी उसका पार नहीं पा सकते ॥२४॥ महाराज दशरथके सौभाग्यकी शिवु, ब्रह्मा, मुनि और सिद्धगण भी प्रशंसा कर रहे हैं। इस समय तुलसीदास भी प्रेमसे- उमँग-उमँगकर प्रभुका सोहिला गा रहा है ॥२५॥

राग बिलावल [ ३ ] आजु महामङ्गल कोसलपुर सुनि नृपके सुत चारि भए । सदन-सदन सोहिलो सोहावनो, नभ अरु नगर निसान हए ॥ १ ॥ सजि-सजि जान अमर-किंनर-मुनि जानि समय सम गान ठए । नाचहिं नभ अपसरा मुदित मन, पुनि-पुनि बरषहिं सुमन-चए ॥ २ ॥ अति सुख बेगि बोलि गुरु भूसुर भूपति भीतर भवन गये । जातकर्म करि कनक, बसन, मनि भूषित सुरभि-समूह दए ॥ ३ ॥ दल-फल-फूल, दूब-दधि-रोचन, जुवतिन्ह भरि-भरि थार लए । गावत चलीं भीर भइ बीथिन्ह, बन्दिन्ह बाँकुरे बिरद बए ॥ ४ ॥

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