भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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३०६ सुन्दरकाण्ड जहाज आदिकी हमें आवश्यकता नहीं होगी। फिर हमारा प्रबल कटक आधे पलमें ही शत्रु की सेनाका संहारकर पापी रावणको जीता ही पकड़ लेगा॥ २॥ तुम शत्रु-समूहकी विधवा नारियोंका अश्रुजल बहना देखोगी और भाई लक्ष्मण तथा सेनाके सहित प्रभुके चरणकमल देखकर परम आनन्द और मङ्गल लाभ करोगी॥ ३॥ मेरे द्वारा लंकाके दहनको देखकर ही तुम इस रामदूतके कथनको सत्य मानना।' तुलसीदासजी कहते हैं, अब शीघ्र ही देवतालोग प्रभुका सुयश गान करेंगे और सबका शोकाग्निमें जलना नष्ट हो जायगा॥ ४॥ [ १५ ] कपिके चलत सियको मनु गहुबरि आयो। पुलक सिथिल भयो सरीर, नीर नयनन्हि छायो॥१॥ कहन चह्यो संदेस, नहि कह्यो, पियके जिय की जानि हृदय दुसह दुख दुरायो। देखि दसा ब्याकुल हरोस, ग्रीषमके पथिक ज्यों घरनि तरनि-तायो॥२॥ नीचतें नीच लगी अमरता, छलको न बलको निरखि थल परुष प्रेम पायो। कें प्रबोध मातु-प्रीतिसों असीस दीन्हीं ह्वै है तिहारोई मन भायो॥३॥ करुना-कोप-लाज-भय-भरो कियो गौन, मौन हो चरन कमल सीस नायो। यह सनेह-सरबस समौ, तुलसी रसना रूखी, ताहीतें परत गायो॥४॥ हनूमान्‌जीके चलते ही सीताजीका हृदय भर आया। उनका शरीर रोमाञ्चित और शिथिल हो गया तथा नेत्रोंमें जल भर