गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
पृष्ठ 357, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३५१ सुन्दरकाण्ड सेन साजि कपि-भालु का-सम कौतुक ही पाथोधि बँधैहैं । घेरोइपै देखिबो लंकगढ़, बिकल जातुधानी पछितैहैं ॥२॥ निसिचर-सलभ कृसानु राम सर उड़ि-उड़ि परत जरत जड़ जैहैं। रावन करि परिवार अगमनो, जमपुर जात बहुत सकुचैहैं ॥३॥ तिलक सारि, अपनाय बिभीषन, अभय-बाँह दै अमर बसैहैं। जय धुनि मुनि, बरसिहैं सुमनसुर, ब्योम बिमान निसान बजैहैं ॥४॥ बंधु समेत प्रानबल्लभ पद परसि सकल परिताप नसैहैं। राम-बामदिसि देखि तुमहि सब नयनवंत लोचन-फल पैहैं ॥५॥ तुम अति हित चितइहौ नाथ-तनु, बार बार प्रभु तुमहि चितैहैं। यह सोभा, सुख-समय बिलोकत काहू तो पलकैं नहि लैहैं ॥६॥ कपिकुल-लखन-सुयस-जय जानकिसहित कुसल निज नगर सिधैहैं। प्रेम पुलकि आनंद मुदित मन तुलसिदास कल कीरति गैहैं ॥७॥ [त्रिजटा बोली-] 'सीते ! धैर्य धारण करो, अब पवनपुत्रसे तुम्हारी सुधि पाकर रघुनाथजी जल्दी ही आवेंगे। वे स्वभावसे ही कृपालु हैं, इसलिये देरी नहीं करेंगे ॥ १ ॥ वे कालके समान वानर और भालुओंकी सेना सजाकर खेलसे ही समुद्रको बाँध लेंगे। अब तुम लंकाको घिरी ही हुई देखोगी, और राक्षसियाँ व्याकुल होकर पछतायेंगी॥ २॥ राक्षसरूपजड़ पतंगेउड़-उड़करभगवान् रामके बाणरूप अग्निमें गिरकर जलते जायेंगे, तथा रावण अपने परिवारको आगे कर यमलोकको जाते हुए बहुत सकुचावेगा ॥ ३ ॥ भगवान् विभीषणको अपनाकर उसे राजतिलक करेंगे और देवताओंको अभयबाहु देकर देवलोकमें बसायेंगे । उस समय मुनिजन जयध्वनि करेंगे, देवता लोग फूल बरसायेंगे और आकाशमें विमानोंपर चढ़कर बाजे बजायेंगे ॥४॥ तथा भाइयोंसहित अपने प्राण-प्रिय रघुनाथजीके