गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगीतावली ३५२ चरण-स्पर्श कर अपये सारे संतापोंको नष्ट कर देंगे। भगवान् रामके वाम भागमें तुम्हें विराजमान देखकर सब नेत्रधारी जीव अपने नेत्रोंका फल प्राप्त करेंगे ॥ ५ ॥ तुम अत्यन्त प्रेमसे प्रभुकी ओर देखोगी और प्रभु बार-बार तुम्हें निहारेंगे। यह शोभा और सुखमय समय देखकर किसीके भी नेत्रोके पलक नहीं लगेंगे ॥ ६ ॥ फिर भगवान् राम वानरोंकी सेना, लक्ष्मणजी, सुयड, लंकाकी विजय और सीताजीके सहित कुशलपूर्वक अपने नगरको जायँगे और तुलसीदास प्रेमसे पुलकित हो, आनन्दसे प्रसन्नचित्त होकर प्रभुकी कमनीय कीर्तिका गान करेगा ॥ ७ ॥
लँकाकाण्ड मन्दोदरी-प्रबोध
राग मारू [ १ ] मानु अजहू सिख परिहरि क्रोधु । पिय पूरो आयो अब काहि, कहु, करि रघुबीर-बिरोधु ॥ १ ॥ जेहि ताड़का-सुबाहु मारि, मख-राखि जनायो आपु । कौतुक ही मारीच