भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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गीतावली ३६ राम-निछावरि लेनको हठि होत भिखारी। बहुरि देत तेहि देखिये मानहुँ धनधारी॥ २४॥ भरत लषन रिपुदवनहूँ धरे नाम बिचारी। फलदायक फल चारिके दसरथा-सुत चारी॥ २५॥ भए भूप बालकनिके नाम निरुपम नीके। सबै सोच-संकट मिटे तबतें पुर-तीके॥ २६॥ सुफल मनोरथ बिधि किये सब बिधि सबहीके। अब होइहै गाए सुने सबके तुलसीके॥ २७॥ अवधमें अत्यन्त सुन्दर आनन्द-बधावे बज रहे हैं। महाराजने रघुवंशमें श्रेष्ठ बालकोंके नामकरणकी शुभ तिथियोंका शोधन कराया ॥१॥ राजा दशरथकी आज्ञा पा ऋषिराज वसिष्ठजीने शिष्य, मन्त्री, सेवक, सखाओंको बुलाया और उन्होंने आदरपूर्वक आकर सिर नवाया ॥ २ ॥ गुरुजीने उन सभी साधु, सुमति और सामर्थ्यवान् लोगोंको शिक्षा दी तथा [ सब तीर्थोंका ] जल, [ तुलसी आदि ] पत्र, [आम्र, नारियल आदि] फल और मूलिका नवग्रहकी मणियाँ आदि सारी पूजोपयोगी सामग्री लिखवायीं ॥ ३ ॥ गणेशजी पार्वती और भगवान् शङ्करका पूजन कर गौओंका दोहन कराया गया, घर-घर महान् आनन्दमङ्गल और सुन्दर गुणगान होने लगा ॥४॥ अपनी मनभावनी बात हो रही है—यह देखकर तुरन्त ही मनमें आनन्दित होकर वे लोग जहाँ-तहाँ चल पड़े, मानों इन्द्रकी आज्ञासे मेघगण पवनके साथ मिलकर दौड़ रहे हों ॥ ५ ॥ घर, आँगन, चौक, गली और बाजारोंको सजाया गया। सर्वत्र कलश, चँवर, तोरण, ध्वजा और चँदोवे लगाये गये॥६॥अति विचित्र और सुन्दर चौक