भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 43

३७ बालकाण्ड पूरे गये; उनमें नाम लिख-लिखकर यह सूचित किया गया कि अमुक चौक अमुकका रचा हुआ है। तालाब और बावड़ियोंको भर-भरकर उनमें अरगजा साना गया है ॥७॥ स्त्री-पुरुषोंने चार ही पलमें सारे साज सजा लिये। इस समय दशरथपुरीने अपनी छबिसे देवपुरीको भी लज्जित कर दिया है ॥८॥ देवता लोग अपने-अपने विमान सजाकर आनन्दपूर्वक आये और हर्षित होकर फूलोंकी वर्षा करने लगे, मानों उन्हें गया हुआ धन फिर मिल गया हो ॥९॥ वेदपाठके लिये चारों वेदके जाननेवाले ब्राह्मण वरण किये गये हैं। उनमें अथर्ववेदी तो स्वयं रघुकुलगुरु ज्ञाननिष्ठ वसिष्ठजी ही हैं, जिनकी महिमा सारा जगत जानता है ॥१०॥ उन्होंने लोकरीति और वेदविधि सम्पन्न कर सुमधुर वाणीमें कहा—'कौसल्यारानीको शीघ्र ही बालक- के सहित बुलवाइये' ॥११॥ यह सुनते ही बड़भागिनी सुवासिनीं स्त्रियाँ उन्हें गाती हुई ले चलीं। यह दृश्य देख और सुनकर पार्वती, लक्ष्मी, शारदा और शची अति प्रेममग्न हुईं ॥१२॥ वे अपनी- अपनी रुचिके अनुसार वेष बनाकर हिल-मिलकर उनके साथ हो गयीं; उस समय मानों तीनों लोकोंका भाग जग गया ॥१३॥ सुन्दर चौकोंमें बैठी हुई रानियाँ गोदमें आनन्दमूर्ति बालकोंको लिये अति शोभायमान हो रही हैं; पुण्यवान् लोग उन्हें देख रहे हैं ॥१४॥ उस समयके सुख, सौन्दर्य और कौतुककी कला देख-सुनकर मुनि- जन मोहित हो जाते हैं, भला ऐसे कौन कवि हैं जो उस समाजका वर्णन कर सकें ? ॥१५॥ फिर ऋषिराज वसिष्ठजी रक्षाऋचा* *ॐ अङ्गादङ्गाभिजायतोऽसि हृदयादभिजायसे । आत्मा वै पुत्रनामासि त्वं जीव शरदां शतम् ॥