भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 432, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 432

गीतावली ४२६ बाजहिं मृदंग,डफ,ताल,बेनु । छिरकैं सुगंधभरे मलय-रेनु ॥ ३ ॥ उत जुवति-जूथ जानकी संग । पहिरे पट भूषन सरस रंग ॥ ४ ॥ लिये छरी बेंत सोंधैंविभाग । चांचरि झूमक कहैं सरस राग ॥ ५ ॥ नूपुर-किंकिनि-धुनि अति सोहाइ । ललना-गन जब जेहि धरइँधाइ ॥६ लोचन आँजहि फगुआ मनाइ । छाड़हिं नचाइ, हाहा कराइ ॥७॥ चढ़े खरनि बिदूषक-स्वाँग साजि । करें कूटि, निपट गइ लाज भाजि॥८॥ नर-नारि परस्पर गारि देत । सुनि हँसत रामभाइन समेत॥९॥ बरषत प्रसून बर-बिबुध-वृंद । जय-जय दिनकर-कुल-कुमुदचंद १० ब्रह्मादि प्रसंसत अवध बास । गावत कलकीरति तुलसिदास ॥११॥ राजाधिराज भगवान् राम फाग खेल रहे हैं, आकाशमें देवता लोग यह कौतुक देख रहे हैं ॥ १ ॥ रघुनाथजीके साथ उनके सखा और छोटे भाई शोभायमान हैं। उनकी झोलियोंमें अबीर है और हाथोंमें पिचकारियाँ ॥ २ ॥ इस समय मृदंग, डफ, करताल और बाँसुरी आदि बाजे बज रहे हैं तथा चन्दनकी रजसे मिला हुआ सुगन्धित जल छिटका जा रहा है ॥ ३ ॥ उधर जानकीजीके साथ रंगबिरंगे वस्त्र और आभूषण पहने युवतियोंका झुंड हाथमें बेंतकी छड़ी लिये रास्ता खोजता है और अत्यन्त सरस चाँचर और झूमक राग गा रहा है ॥ ४-५ ॥ जब वे स्त्रियाँ दौड़कर किसीको पकड़ती हैं तो उनके नूपुर और करधनीकी ध्वनि बड़ी ही मनोहर जान पड़ती है ॥ ३ ॥ वे जिसे पकड़ती हैं, उसके नेत्रोंमें अञ्जन लगा देती हैं तथा उससे फगुआ मनाकर और नाच नचाकर बहुत प्रार्थना करने- पर छोड़ती हैं ॥ ७ ॥ बहुत-से लोग मसखरेका स्वाँग रचकर गधों- पर चढ़े हुए हैं। वे तरह-तरहकी कूटोक्तियाँ बोलते हैं, इस