गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४५ बालकाण्ड फूल बरसाते हैं और नवीन नेहसे युक्त साधुवाद कहते हैं कि मानो विधाताने अपने जीवनभरमें इन्हीं माता, पिता, पुत्र, सुहृद् और परिजनोंको रचा है ॥ ३ ॥ बड़ी आयुके स्त्री-पुरुष आशीर्वाद देते हैं कि 'तुम अजर-अमर होओ, भगवान् विष्णु और महादेवजी तुम- पर सदा दयादृष्टि रक्खें।' तुलसीदास कहते हैं कि वे उनके भाग्यकी सराहना करते हैं जिनके मन बालरूप रामके अनुरागमें रँगे हुए हैं ॥ ४ ॥ राग आसावरी [ १२ ] 'आजु अनरसे हैं भोरके, पय पिय पियत न नीके । रहत न बैठे, ठाढ़े, पालने झुलावत हू, रोवत राममेरो सो सोच सबहीके ॥ १ ॥ देव, पितर, ग्रह पूजिये तुला तौलिये घीके। तदपि कबहुँ कबहुँक सखी ऐसेहि अरत जब परत दृष्टि दुष्ट तीके ॥ २ ॥ बेगि बोलि कुलगुरु, छुऔं माथे हाथ अभीके ।' सुनत आइ ऋषि कुस हरे नरसिंह मंत्र पढ़े, जो सुमिरत भय भीके ॥ ३ ॥ जासु नाम सरबस सदासिव-पारबतीके । ताहि झरावति कौसिला, यह रीति प्रीतिकी हिय हुलसति तुलसीके ॥ ४ ॥ [ कौसल्या कहती हैं, कि ] 'आज मेरे राम सबेरेसे ही अनमने हो रहे हैं, अच्छी तरह दूध भी नहीं पीते । आज बैठने, खड़े होने