भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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५५ बालकाण्ड और दुःख अपने ऊपर ले लूंगी ॥३॥ राजा और रानीको अपने पुत्र तथा कुटुम्बियोंके सहित देखकर मैं नेत्रोंका फल पाऊँगी और वहाँ—तुलसीदास कहते हैं कि उन सबके साथ मिलकर रघुवंश- तिलक भगवान् रामके पवित्र चरित्र गाऊँगी ॥४॥ राग आसावरी [ २२ ] कनक-रतनमय पालनो रच्यो मनहुँ मार-सुतहार । बिबिध खेलौना, किंकिनी, लागे मंजुल मुकुताहार ॥ रघुकुल-मंडन राम लला ॥ १ ॥ जननि उबटि, अन्हवाइकै, मनिभूषन सजि, लिये गोद । पौढ़ाए पटु पालने, सिसु निरखि मगन मन मोद ॥ दसरथनंदन राम लला ॥ २ ॥ मदन, मौरकै चंदकी अलकनि, निदरति तनु-जोति । नील कमल, मनि, जलदकी उपमा कहे लघु मति होति ॥ मातु-सुकृत फल राम लला ॥ ३ ॥ लघु, लघु लोहित ललित हैं पद, पानि अधर, एक रंग । को कबि जो छबि कहि सकै नखसिख सुंदर सब अंग ॥ परिजन-रंजन राम लला ॥ ४ ॥ पग नूपुर, कटि किंकिनी, कर-कंजनि पहुँची मंजु । हिय हरि नख अदभुत बन्यो मानो मनसिज मनि-गन-गंजु ॥ पुरजन-सिरमनि राम लला ॥ ५ ॥ लोचन नील सराजसे, ऊपर मसिबिंदु बिराज । जनु बिधु-मुख-छबि-अमियको रच्छक राखे रसराज ॥ सोभासागर राम लला ॥ ६ ॥