गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगीतावली ५६ गधुँआरी अलकावली लसैं, लटकन ललित ललाट । जनु उडुगन बिधु मिलनको चले तम बिदारि करि बांट ॥ सहज सोहावनो राम लला ॥ ७ ॥ देखि खिलौना किलकहीं, पद पानि बिलोचन लोल । बिचित्र बिहँग अलि-जलज ज्यों सुखमा-सर करत कलोल ॥ भगत-कलपतरु राम लला ॥ ८ ॥ बाल-बोल बिनु अरथके सुनि देव पदारथ चारि । जनु इन्ह बचनन्हितें भए सुरतरु तापस त्रिपुरारि ॥ नाम-कामधुक राम लला ॥ ६ ॥ सखी सुमित्रा वारहीं मनि भूषन बसन बिभाग । मधुर झुलाइ मल्हावहीं गवैं उमँगि उमँगि अनुराग ॥ हैं जग-मंगल राम लला ॥ १० ॥ मोती जायो सीपमें श्ररु अदिति जन्यो जग-भानु । रघुपति जायो कौसिला गुन-मंगल-रूप-निधानु ॥ भुवन-विभूषन राम लला ॥ ११ ॥ राम प्रगट जबतें भए सकल श्रमंगल-मूल । मीत मुदित, हित उदित हैं, नित बैरिनके चित सूल ॥ भव-भय-भंजन राम लला ॥ १२ ॥ श्रनुज-सखा-सिसु संग लै खेलन जैहैं चौगान । लंका खरभर परैंगी, सुरपुर बाजिहैं निसान ॥ रिपुगन-गंजन राम लला ॥ १३ ॥ राम अहेरे चलहिये जब गज रथ बाजि सँवारि । दसकंधर उर धकधकी श्रब जनि धावै धनु धारि ॥ श्ररि-करि-केहरि राम लला ॥ १४ ॥