भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 63

५७ बालकाण्ड गीत सुमित्रा सखिन्हकै सुनि सुनि सुर मुनि अनुकूल । दै असीस जय जय कहैं हरषैं बरषैं फूल ॥ सुर-सुखदायक राम लला ॥ १५ ॥ बालचरितमय चंद्रमा यह सोरह-कला-निधान । चित-चकोर तुलसी कियो कर प्रेम-अमिय-रसपान ॥ तुलसीको जीवन राम लला ॥ १६ ॥ सुवर्ण और मणियोंसे जड़ा हुआ मनोहर पालना है, जिसे मानो कामदेवरूप बढ़ईने बनाया है। उसमें तरह-तरहके खिलौने, घुंघरू और मनोहर मोतीकी मालाएँ लगी हुई हैं। उसीमें रघुकुल- भूषण रामलला विराजमान हैं ॥१॥ माताने दशरथनन्दन रामललाको उबटन लगा, स्नान करा और मणिमय आभूषणोंसे सुसज्जित कर गोदमें लिया और फिर उस सुन्दर पालनेमें सुला दिया। बालक रामको देखकर माताका मन आनन्दमग्न हो रहा है ॥२॥ रामके श्याम शरीरकी कान्ति कामदेव ओर मोरपङ्खकी चन्द्रिकाकी आभाका भी निरादर करती है। यदि उसकी उपमा नील कमल, नील मणि अथवा नील मेघसे दी जाय तो बुद्धिकी लघुता प्रकट होती है। रामलला तो माताके पुण्यपुञ्जका फल ही हैं ॥३॥ रामके नन्हें-नन्हें पाँव, हाथ और अधर एक ही रंगके, अति सुन्दर और अरुणवर्ण हैं। नखसे शिखतक उनके सभी अङ्ग सुन्दर हैं। ऐसा कौन कवि है जो इनकी छविका वर्णन कर सके ? रामलला अपने सभी कुटुम्बियोंको आनन्दित करनेवाले हैं ॥४॥ रामके चरणोंमें नूपुर, कटिप्रदेशमें किंकिणी, करकमलोंमें मनोहरपहुँची और हृदयमें अतिअद्भुत बघनहा शोभायमान है, जो मानो कामदेवकी मणियोंका ढेर हो। रामलला