गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहैं ॥ १२ ॥ जिस समय भगवान् राम अपने भाई और साथी बालकोंको सङ्ग लेकर गेंद खेलने जायँगे, उस समय लङ्कामें खलबली पड़ जायगी और स्वर्गमें बाजे बजने लगेंगे, क्योंकि रामलला शत्रुदल- का दमन करनेवाले हैं ॥ १३ ॥ जिस समय रामचन्द्रजी हाथी, घोड़े और रथ सँभालकर मृगमायाके लिये चलेंगे, उस समय रावणके हृदयमें धड़कन होने लगेगी कि कहीं धनुष लेकर मेरी ओर न दौड़ पड़ें; क्योंकि श्रीरामलला शत्रुरूप हाथीके लिये साक्षात् सिंह ही हैं ॥ १४ ॥ सुमित्रा और सखियोंके गीत सुन-सुनकर देवता और मुनिजन प्रसन्न होते हैं तथा आशीर्वाद देते हुए जय-जयकार कर हर्षित हो फूलोंकी वर्षा करते हैं। रामलला देवताओंको आनन्द प्रदान करनेवाले हैं ॥ १५ ॥ तुलसीदासने प्रेमामृतरसका पान कर चित्तरूप चकोरके लिये यह षोडशकलानिधान बालचरितरूप चन्द्रमा* रचा है। रामलला तो तुलसीदासके जीवन ही हैं ॥ १६ ॥ राग कान्हरा [ २३ ] पालने रघुपुति झुलावै । लै लै नाम सप्रेम सरस स्वर कौसल्या कल कीरति गावै ॥ १ ॥ केकिंकंठ दुति स्यामबरन बपु, बाल बिभूषन बिरचि बनाए । अलक कुटिल, ललित लटकनभ्रू, नील नलिन दोउ नयन सुहाए ॥ २ ॥ सिसु-सुभाय सोहत जब कर गहि बदन निकट पदपल्लव लाए । मनहुँ सुभग जुग भुजग जलज भरि लेत सुधा ससि सों सचु पाए ॥ ३ ॥
- इन सोलह पदोंमें बालरूप रामकी रूप-माधुरीका वर्णन किया गया है। इनमें एक-एक पद चन्द्रमाकी उत्तरोत्तर बढ़ती हुई कलाओंका सूचक है। इस प्रकार इनमें षोडशकलानिधान चन्द्रमाकी उत्प्रेक्षा की है ।