गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबालकाण्ड ६१ अधर-पानि-पद लोहित लोने। सर-सिंगार-भव सारस सोने ॥ ३ ॥ किलकत निरखि बिलोल खिलौना। मनहुँ बिनोद लरत छबि छौना ॥ ४ ॥ रंजित-अंजन कंज-बिलोचन। भ्राजत भाल तिलक गोरोचन ॥ ५ ॥ लस मसिबिंदु बदन-बिधु नीको। चितवत चितचकोर तुलसीको ॥ ६ ॥ श्रीरामलला पालनेमें झूलते हुए शोभा पा रहे हैं और बड़भागिनी माताएँ उनकी ओर निहार रही हैं ॥ १ ॥ भगवान्के शरीरमें अति मृदुल और मञ्जुल श्यामता सुशोभित है, जिसपर बालोचित आभूषणों- की झाँईं झलक रही है ॥ २ ॥ प्रभुके अति सुन्दर अरुणवर्ण ओठ, हाथ और चरण ऐसे जान पड़ते हैं, मानो शृङ्गारसरोवरमें उत्पन्न सोनेका कमल हो ॥३॥ खिलौनेको हिलता हुआ देखकर किलकारी मारते हैं, मानो छविके छोटे-छोटे बालक खेल-खेलमें लड़ रहे हों ॥४॥ नयनकमलोंमें अञ्जन आँजा हुआ है तथा मस्तकपर गोरोचन- का तिलक सुशोभित है ॥ ५ ॥ मनोहर मुखचन्द्रपर अति सुन्दर काजलकी बिन्दी लगी हुई है। उस मुखमयङ्कको तुलसीका चित्तरूप चकोर निहार रहा है ॥ ६ ॥ राग कल्याण [ २५ ] राजत सिसुरूप राम सकल गुन-निकाय-धाम, कौतुकी कृपालु ब्रह्म जानु-पानि-चारी। नीलकंज-जलदपुंज-मरकतमनि-सरिस स्याम, काम कोटि सोभा अंग अंग उपर बारी ॥ १ ॥ हाटक-मनि-रत्न-खचित रचित इंद्र-मंदिराभ, इंदिरानिवास सदन बिधि रच्यो संवारी।