गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगीतावली ७४ राग ललित [ ३३ ] छोटी छोटी गोड़ियाँ अँगुरियाँ छबीलीं छोटी, नख-जोति मोती मानो कमल-दलनिपर । ललित आँगन खेलैं, ठुमुकु ठुमुकु चलैं, झुँझुनु झुँझुनु पाँय पैंजनी मृदु मुखर ॥ १ ॥ किंकिनी कलित कटि हाटक जटिल मनि, मंजु कर-कंजनि पहुँचियाँ रुचिरतर । पियरी झीनी झँगुली साँवरे सरीर खुली, बालक दामिनि ओढ़ी मानो बारे बारिधर ॥ २ ॥ उर बघनहा, कंठ कठुला, झँडूले केश, मेढ़ी लटकन मसिबिंदु मुनि-मन-हर । अंजन-रंजित नैन, चित चोरैं चितवनि, मुख-सोभापर वारौं अमित असमसर ॥ ३ ॥ चुटकी बजावती नचावती कौसल्या माता, बालकेलि गावति मलहावति सुप्रेम-भर । किलकि किलकि हँसैं, द्वै द्वै दँतुरियाँ लससैं, तुलसीके मन बसैं तोतरे बचन वर ॥ ४ ॥ छोटे-छोटे चरण हैं, उनमें नन्हीं-नन्हीं छबीली अँगुलियाँ हैं, जिनकी नखद्युति ऐसी जान पड़ती है मानो कमलदलपर मोती सुशोभित हों। मनोहर आँगनमें खेलते समय जब ठुमुक-ठुमुक चलते हैं तो पैरोंसे पैंजनियोंका सुमधुर झुनझुन-झुनझुन शब्द होता है ॥ १ ॥ कमरमें सुवर्णकी मनिजटित मनोहर किङ्किणी है तथा हाथों में अति सुन्दर पहुँचियाँ हैं। साँवरे शरीरपर अति झीनी पीतवर्ण