भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 81

७५ बालकाण्ड झंगुलियाँ ऐसी शोभित होती हैं मानो किसी छोटे बादलने बाल- विद्युत् ओढ़ रक्खी हो ॥ २ ॥ छातीपर व्याघ्रनख है, कण्ठमें कठुला पड़ा हुआ है तथा माथेपर मुनियोंके मनको चुरानेवाले गंभुआरे केश, चोटी, लटकन और काजलकी बिन्दी विराजमान हैं। भगवान्‌के नयन अञ्जनरञ्जित हैं, उनकी चितवन चित्तको चुराये लेती है, उनकी मुखछबिपर तो मैं अनन्त कामदेवोंको निछावर करता हूँ ॥ ३ ॥ माता कौसल्या चुटकी बजा-बजाकर नचाती हैं और प्रेममें भरकर बाललीला गाती हुई दुलारती हैं। भगवान् किलक-किलककर हँसते हैं, उनके मुखमें दो-दो दाँत शोभायमान हैं। तुलसीदासके हृदयमें उनके अति मनोहर तोतले वचन बसे हुए हैं ॥ ४ ॥ [ ३४ ] सादर सुमुखि बिलोकि राम-सिसुरूप, अनूप भूप लिये कनियाँ । सुंदर स्याम सरोज बरन तनु, नखसिख सुभग सकल सुखदनियाँ ॥ १ ॥ अरुन चरन नखजोति जगमगति, रनभुनु करति पाँय पेंजनियाँ । कनक-रतन-मनि जटित रटति कटि किँकिनि कलित पीतपट तनियाँ ॥ २ ॥ पहुँची करनि, पदिक हरिनख उर, कठुला कंठ, मंजु गजमनियाँ । रुचिर चिबुक, रद, अधर मनाहर, ललित नासिका लसति नथुनियाँ ॥ ३ ॥ बिकट भ्रकुटि, सुखमानिधि आनन, कल कपोल, काननि नगफनियाँ । भाल तिलक मसि बिंदु विराजत, सोहति सीस लाल चौतनियाँ ॥ ४ ॥ मनमोहनी तोतरी बोलनि, मुनि-मन-हरनि हँसनि किलकनियाँ । बाल सुभाय बिलोल बिलोचन, चोरति चितहि चारु चितवनियाँ ॥ ५ ॥