भारतकोश
गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

Gobhila Grihyasutram of Samaveda with Commentary

महर्षि गोभिल (टीकाकार: पण्डित मुकुन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

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curve, but wait, 'र्द्धु' is on the next letter! Let's transcribe faithfully. It looks like नादूर्धुकः or नानर्द्धुकः. Wait, look closely: it's नादूर्धुकः - wait, the loop goes down, like 'दूर्धुकः'.

Line 29: आरणेयः स्वनिष्ठद्धिसाधनहोमैः शक्नोति प्रणाल्या ऋद्धिं साधयितुमित्यदोषः । अतए- Wait, "स्वनिष्ठद्धिसाधनहोमैः" or "स्वनिष्ठर्द्धिसाधनहोमैः"? स्वनिष्ठ + ऋद्धि = स्वनिष्ठर्द्धि! Look at the text: 'स्व', 'नि', 'ष्ठ', 'र्द्धि'! Yes, "स्वनिष्ठर्द्धिसाधनहोमैः".

Line 30: वाह कर्म्मप्रदीपः-“पुण्यमेवादधीताग्निं स हि सर्वैः प्रशस्यते । अनर्द्धुकत्वं यत्तस्य का-

Line 31: म्यैस्तन्नीयते शमम्” इति ॥

Footnote (2): Line 32: ( २ ) तदेतदनुपदमुक्तं गृह्यान्तरव्याख्यायाम् ।

Footnote (3): Line 33: `( ३ ) राजन्यात्तत्कुलादेवमग्रेऽपि व्याख्ये

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