भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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सब जड़ मूल से उखड़ जाएँगे और वे इस देश व समाज के उत्थान में अमूल्य योगदान देने में सक्षम होंगे।

पंन्यास चंद्रशेखरविजय जी (श्री वासु के पुस्तकों की प्रस्तावना में से)

अंग्रेजों ने पाठ्य पुस्तकों द्वारा इस प्रकार भाष्रक इतिहास की परम्परा बनाकर तथाकथित देशी अंग्रेजों के एक वर्ग को पैदा कर, जाने से पहले यहाँ छोड़ दिया। इस गलत इतिहास के बल पर, इस देश के दो टुकड़े कर दिये गए, इतना ही नहीं भविष्य में ज्यादा टुकड़े होते रहें।

लॉर्ड मैकाले द्वारा 2 फरवरी 1835 को ब्रिटिश पार्लियामेन्ट में बोले हुये शब्द:

“मैंने भारत की लम्बाई और चौड़ाई तक पूरा भ्रमण किया तथा एक व्यक्ति को भी नहीं देखा जो भिखारी और चोर हो। मैंने इतनी सम्पत्ति को इस देश में देखा, इतने ऊँचे नैतिक आदर्श, इतने योग्य लोग, मैं नहीं सोचता कि हम इस देश को जीत पायेंगे जब तक कि हम इस देश की रीढ़ की हड्डी जो कि इसकी आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक परम्परा है, को नहीं तोड़ देते हैं। इसलिए मैं प्रस्ताव रखता हूँ कि हमें उनकी पुरानी व प्राचीन शिक्षा प्रणाली व संस्कृति को बदलना होगा। क्योंकि यदि भारतीय सोचते हैं कि, जो कुछ विदेशी तथा अंग्रेजी वस्तु है, वह अच्छी तथा उनकी अपनी वस्तुओं से बेहतर है तो वे अपना आत्म-सम्मान, अपनी नैसर्गिक संस्कृति को खो देंगे तथा वे वही बनेंगे जो हम चाहेंगे, एक सचमुच का गुलाम देश।”

A black and white portrait of Lord Macaulay, a British statesman and historian. He is shown from the chest up, wearing a dark coat and a white cravat. He has a serious expression and is looking slightly to the left. Below the portrait is his signature, which appears to read 'M. Macaulay'.