भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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अंग्रेजों के झूठ

आर्य प्रजा का उद्भव इसी देश में हुआ था। “आर्य लोग उत्तरी ध्रुव की ओर से भारत में बंजारा जाति के रूप में आए थे और द्रविड़ प्रजा को पराजित कर, इस पर उन्होंने अपना प्रभुत्व जमा दिया,” ये अंग्रेजों की कपोलकल्पित बातें हैं, मनगढ़ंत बातें हैं। ऐसे करने के पीछे उनका ध्येय यह था कि ‘कभी भी आर्य प्रजा उनसे कहे कि आप लोग विदेशी हैं, अतः भारत छोड़कर चले जाएँ,’ तो उन्हें कह सकें कि ‘तुम लोग भी विदेशी हो, इस देश के मूल निवासी तो वास्तव में द्रविड़ ही हैं।’

आर्य प्रजा लाखों वर्षों से यहीं की निवासी है। उसका क्रमबद्ध इतिहास भी है। लेकिन उन तमाम बातों को दबाकर, अंग्रेजों ने भ्रामक प्रचार शुरू कर दिया कि ‘आर्य, उत्तरी ध्रुव की ओर से आई बंजारा टोलियों के ही वंशज हैं,’ अंग्रेजों ने पाठ्य-पुस्तकों द्वारा इस प्रकार भ्रामक इतिहास की परम्परा बनाकर तथाकथिक देशी अंग्रेजों के एक वर्ग को पैदा कर, जाने से पहले यहाँ छोड़ दिया। इस गलत इतिहास के बल पर, इस देश के दो टुकड़े कर दिये गए, इतना ही नहीं भविष्य में ज्यादा टुकड़े होते रहें।

अंग्रेजों ने 150 वर्षों से भी कम समय में गलत इतिहास और भ्रामक शिक्षा द्वारा हिन्दुओं की भव्यता, धर्म, संस्कृति, चरित्र और गौरव का खंडन कर, अंग्रेजी संस्कृति के आराधक वर्ग को तैयार कर लिया। यह अल्पसंख्यावाला वर्ग 60 करोड़ जैसी विराट बहुसंख्यक प्रजा के सिर पर विदेशी संस्कृति, आचार-विचार, रहन-सहन, रुचि-अरुचि, विचारशैली और अर्थ-व्यवस्था थोप देने के लिए रात-दिन प्रयत्नशील रहा। इससे बढ़कर और क्या अत्याचार हो सकता है? स्वाधीनता प्राप्त होने के बाद यह आसुरी प्रवृत्ति अधिक बढ़ पाई है क्योंकि स्वाधीनता प्राप्त होने के बाद भी अंग्रेजों ने हमारा सत्यानाश करने के उद्देश्य से शिक्षा नामक जो सुरंग दाग दी हैं, उसने शिक्षा क्षेत्र में से भारतीयता का नामोनिशान मिटा दिया हैं।