गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंशिक्षा का ध्येय
देश की सही प्रगति का मूलाधार शिक्षा है। शिक्षा में चरित्र निर्माण करने की, मोक्षलक्ष्यी होने की और आसुरी बलों पर विजय पाने की क्षमता होनी चाहिए। वर्तमान सरकार के लिए प्रगति का मापदंड हिंसा, भ्रष्टाचार और शोषण द्वारा साध्य विशिष्ट वर्ग की आर्थिक उन्नति ही हैं।
इतिहास शिक्षा का महत्वपूर्ण अंग है। इतिहास द्वारा प्रजा का चरित्र निर्माण होता है। गलत इतिहास से हीनग्रंथि पैदा की जा सकती है। प्रजा विदेशियों की मुहताज ही बनी रहे, उसे इतनी कायर भी बनायी जा सकती है। हमारी प्रजा भी इसी बात का दृष्टान्त है।
अँधेरे में जाती भारत की शिक्षा प्रणाली
A photograph showing a large group of school children sitting on the ground in an outdoor area, possibly a school courtyard or a temporary classroom. They are arranged in rows, facing towards the left. Some children are looking towards the camera, while others are looking towards the teacher. A teacher in a blue shirt is standing on the left side of the frame, near a brick wall. There are some books and bags on the ground near the children. A large, leafy tree is visible in the background, providing shade. The setting appears to be a rural or semi-rural area.
भाषा द्वारा मानस परिवर्तन
ट्रेवेलियन के मतानुसार अंग्रेजी शिक्षा के प्रभाव से मुक्त रहे हिन्दू और मुसलमान भी अंग्रेजों को अपवित्र राक्षस समझते थे और उन्हें हटा देने के षड्यन्त्र बनाते थे। लेकिन जहाँ-जहाँ अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव फैलता गया वहाँ-वहाँ भारतवासियों का मानस परिवर्तन होता गया। वे अंग्रेजों को अपने महान उपकारक, उद्धारक और बलवान मित्र समझने लगे हैं। उन्हें संकीर्णता के लिए अंग्रेजों के प्रति वफादारी और भक्तिभाव रखने लगे हैं। देश का नसीब केवल