भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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अंग्रेजों की सहायता और रक्षा से ही उदीयमान होगा, ऐसी मान्यता का प्रचार करते हैं।

आगे चलकर सर चार्ल्स ट्रेवेलियन बताते हैं कि जो युवक हमारी शाला में शिक्षा लेते हैं, वे अपने पूर्वजों और अभिभावकों का तिरस्कार करने लगे हैं। तदुपरांत वे अपनी राष्ट्रिय संस्थाओं को अंग्रेजियत का स्वरूप दिलाने के लिए कटिबद्ध होने लगे हैं। अंग्रेजों को उखाड़ कर समुद्र में फेंकने के बजाय भारत के लिए अंग्रेजों की शिक्षा और रक्षा दोनों बातें अनिवार्य बन गई हैं, ऐसी मान्यता के समर्थक बन गये हैं।

ट्रावेलियन कहते हैं –‘मैंने हिन्दुस्तान के ऐसे प्रदेश में वर्षों का समय गुजारा है, जहाँ अंग्रेजी भाषा की शिक्षा का प्रारंभ नहीं हुआ। वहाँ के लोग अंग्रेजों का कट्टर दुश्मन मानते हैं और उन्हें खत्म कर देने के उपाय सोच करते हैं।’

‘परंतु मैं जब बंगाल में गया तब वहाँ हमने अंग्रेजियत से रंग देने के कारण वहाँ के शिक्षित भारतवासी अंग्रेजों का गला घोटने के बदले अंग्रेजों के साथ ज्यूरी में बैठने में और बैंच मजिस्ट्रेट बनने में धन्यता का अनुभव करते हैं।’

पुरानी प्रणालियों की ताकत का भय

आगे ट्रेवेलियन लिखते हैं कि ‘यदि भारत की प्राचीन रीतियाँ व नीतियाँ एवं उनकी शिक्षा और साहित्य के अस्तित्व को यथाशीघ्र नामशेष न कर दिया तो संभव है कि कभी क्षणमात्र में ही भारत से हमारा अस्तित्व मिट जायेगा।’

शोध समिति के अध्यक्ष ने ट्रेवेलियन से पूछा था कि, ‘आप की योजना का अंतिम ध्येय भारत और इंग्लैण्ड के बीच राजनैतिक संबंध का विच्छेद करना है या हमेशा के लिए उसे सुदृढ़ करना है?’