भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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होगा। यह सामर्थ्य ज्ञान का, प्रेम का और तप का होगा। ऐसा सामर्थ्य प्राप्त करने के लिए भी धर्मानुसारी शिक्षा की आवश्यकता हैं।

हमने जो विकास का रास्ता लिया है, वह विकास नहीं है, वह तो रावण की सर्वनाश करने वाली लंका का रास्ता है। अगर देश को बदलना हो तो गुरुकुलम् चलाना ही चाहिए। - डॉ प्रवीण तोगडिया

  1. 1. इस देश की बहुत बड़ी विशेषता रही है कि मानवजीवन के लिए जो अनिवार्य है, वह निःशुल्क था। शिक्षा अनिवार्य है तो वह निःशुल्क थी। वैदकीय सेवाएँ निःशुल्क थी।
  2. 2. राजा का बेटा जहाँ पढ़ता था वहाँ किसान का बेटा भी पढ़ता था। हमारा संस्कृतिक पतन भी हुआ और मैकाले ने हमारा ब्रेनवाश करने का काम किया। अंग्रेज तो चले गये पर 'काले अंग्रेज' यहाँ छोड़कर गये, जिनका चिंतन, जिनकी सोच मूलतः इस देश की संस्कृति और मानव-सभ्यता एवं विश्वकल्याण के साथ सुसंगत नहीं है। दुर्भाग्य की बात है कि आज का समाज-जीवन इतना कम्पलेक्ष(जटिल) बन चुका हैं, कि व्यक्ति उस रास्ते पे नहीं चलेंगे तो जी नहीं पायेंगे। ना आर्थिक दृष्टि से, ना सामाजिक दृष्टि से।
  3. 3. कहते हैं कि प्रलय आता है तब ईश्वर पुनः सृष्टि निर्माण के लिए कुछ बचाकर विध्वंस करता है ताकि प्रलय के बाद पुनः सृष्टि निर्माण प्रारंभ कर सके। वैसे ही संस्कृति के महाप्रलय काल कि में उत्तमभाई ने पुनः निर्माण की प्रक्रिया यहाँ प्रारम्भ की है। पुनर्निर्माण कठिन होता है। मुश्किल होता है। क्योंकि इन्सान अकेला निकलता है, दुनिया हँसती है, तो भी विचार को दृढ़ रखकर जो आगे जाता है, वह अपना मूल रास्ता लोगों को स्वीकृत कराने के लिए अपने चरित्र से और दृढ़ता से प्रयत्न करता है। ऐसी एक बड़ी प्रतिकृति शिक्षा