गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
DevanagariHindipublished78 पृष्ठ
पृष्ठ 48, कुल 78 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 48
की यहाँ खड़ी होगी। आगे जाकर अनेक लोगों से चर्चा के आधार पर उन्हें विकसित करते जायेंगे।
- 4. पैसे नहीं है तो पानी नहीं मिलेगा। अब तो लगता है कि पैसे होंगे सांस ले पाओगे, वरना सांस भी नहीं ले पाओगे। इतना व्यापारीकरण दुनिया के इतिहास में कभी नहीं हुआ था।
- 5. चालीस साल पहले में गाँव में रहता था, हमारे गाँव में दूध नहीं बिकता था। लोगों को मुफ्त में देते थे। जिस देश में दूध नहीं बिकता था, घी नहीं बिकता था, उस देश में 12 रुपये में पानी की बोतल बिकने लगी है। फिर तो स्त्री और पुरुष बिकेंगे। उसमें आश्चर्य क्या है। आप पानी बेच सकते हो, अपने मूल्य बेच सकते हो, अपना इतिहास, अपने पुरखों, अपने मूल्य बेच सकते हो, अपना इतिहास, अपने पुरखों, अपने धर्म को और देश को भी बेच सकते हो।
- 6. इसलिए हमें शास्त्र की रक्षा करनी चाहिए, परंतु शास्त्र की रक्षा करने के लिए, शांति के लिए, अहिंसा की रक्षा के लिए इस देश में पुनः महान आर्य परंपरा की स्थापना जरूरी है। हमारे दिल की कामना है कि भारत में हमारी आर्य परंपरा पुनः स्थापित हो।
- 7. मैकाले ने हमारी शिक्षा बदल दी। इस देश में 18 वीं सदी में अंग्रेज आये। भारत की शिक्षा-व्यवस्था अध्ययन किया। उन्होंने लिखा कि हिन्दू कैसे लोग हैं, जो अपने बच्चों को 'क, ख, ग, घ' नहीं सिखाते हैं। प्रत्येक के साथ एक श्लोक होता है, जो उनमें चरित्र का निर्माण करता है। हम सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं देते थे, अक्षरज्ञान के साथ उनमें चरित्र भी देते थे। आज की ये आधुनिक शिक्षण पद्धति ने प्रवीण तोगडिया को एक डॉक्टर बना दिया। मेरी पूरी मेडिकल शिक्षा में नैतिक मूल्यों का एक भी पेज पर उल्लेख नहीं है। ये आधुनिक शिक्षा पद्धति है। मैकाले ने हमारी जो मूल्य युक्त शिक्षा पद्धति थी, उनका अध्ययन करने के बाद उसका सर्वनाश, गुरुकुल अकेले दक्षिण भारत में मद्रास में थे, जो मुफ्त पढ़ाते थे। तो इनकी व्यवस्था चलती कैसे थी? हर