हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो १५ जष* रासि जानि नव अंस सुद्ध । तम तीन अंस मूरति समुद्ध x ॥ त्रिय धूमकेतु गुण अंस जानि । भृगु सप्त गुरू¹ सत्रा सु मानि ॥ ८४ ॥ तन लग्न उभै जानो सु जानिं । फल कह्यौ वरष सत आयु मानि ॥ षय भाव भौंन तिहिं भवनहीन । कछु घटे बरष तिन मैं प्रवीन ॥ ८५ ॥ तिहिं समय अटल थूणी सथप्प । गणनाथ पूजि सुभ मंत्र जप्प ॥ करि होम देव पुज्जे अपार । गो भुंमि रत्न हाटक सुढार ॥ ८६ ॥ दिय दाँन द्विजिन बहु विधि अनेक । नृप जैत सकल पुज्जे विवेक ॥ तिय करत गाँन मंगल सरूप । धुनि दुंदभि बज्जत अति अनूप ॥ ८७ ॥ सब करहिं हरष नर नारि बृंद । यहि भाँति नीम रचना सुछंद ॥ ८८ ॥ दंहरा छंद ग्यारा सइ दस अगरो, संवत माधव मास । सुक्कु तीज शनिवार कें, चंद्र रक्ष अनयास ।'८६॥ थूणीगढ़ रणथंभ की, रोपी पदम् प्रताप । सुमरि गणेस गिरीस कौ, नगर बसायौ आप² ॥९०॥ १ सतम गुरु । २ आय ।
- जष ( झष )=मीन ( राशि ) X समुद्ध=समृद्ध । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri