हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ३१ गजनी गौरो साह सुत, भय अलावदी साय । ताहीं दिन रणथंभ, गढ़, जन्म हमीर सु आय ॥१७३॥ यह हमीर नृप जैत कै, अमर करण आचार । मीणा भारू बंधु दोउ भई नारि तिहिँ बार ॥१७४॥ छंद पद्धरी ससि रुद्र बेद संबत सुजाँन । षट सहस इक्क साको प्रमाँन ॥ रबि जाँम अयन दक्षण सुगोल । ऋतु सरद सुभ्र सुंदर अमोल ॥ १७५ ॥ तिथि भाँन उंर्ज बल पच्छि जानि । रबि घटो तीस अरु दोय मानि ॥ हिर वुध्न बेद घटि घटिय साठ । व्याघात योग मुनि घटी आठ ॥ १७६ ॥ बालव्व नाम सोइ कहत कर्ण । यहि भाँति कह्यउ पंचांग बर्ण ॥ रबि उदय इष्ट घटिका छतीस । पल सून्य पंच जान्यूँ सदीस ॥ १७७ ॥ पल षोड़स अट्ठावीस दंड । दिनमाँन जाँन तिहिं दिन सुमंड ॥ इकतीस चवाली रात्रि मानि । सब घटिय साठि दिन राति जानि¹ ॥१७८॥ भौ² जन्म लग्न मिथुनेस आय । द्वादसह अंस गंस भए बताय ॥ तुलभाँन सप्तदस अंस मानि । सरि रुद्र³ अंस झख रासि मानि⁴ ॥१७९॥ १ मानि । २ भयौ । ३ सर रुद । ४ जानि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri