भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 118, कुल 258 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 118

३२ हम्मीररासो मंगल सुआल धरि एक अंस। बुध बारह वृश्चिक मैं प्रसंस ॥ घटि जीव एक अंसह सुसुद्ध । भृगु कन्या विद्या सुभग उद्दु ॥१८०॥ संसि मीन तीस कटि एक अंस । तिय राशि कह्यौ सुरभानुत्तंस ॥ सोइ कहे अंस चौबीस पूर । यह जन्म लग्न हम्मीर सूर ॥१८१॥ सुनि राव जैत मन हर्ष किन्न । भंडार अमित सब खोलि दिन्न ॥ गुरु बिप्र मंत्र मंत्री सु बोलि । बड़ भीर भइय नृप आय पौलि ॥१८२॥ किय स्राद्ध नंदि मुख बेद वृद्धि १ । सब जात कर्म किन्नौ सु सुद्धि ॥ गो भुम्मि अन्न कंचन सु दिन्न । द्विजराज सकल संतुष्ट किन्न ॥१८३॥ लिय बोलि सकल जाचक सु वृंद । हय हेम सुखासन दीन बंद ॥ बहु भूषन वाहन बिबिध रंग । जिहिं चाह लही सो दियौ संग ॥१८४॥ दधि दूब हरद भरि कनक थाल । बहु गाँन करत प्रबिसंत बाल ॥ दुंदुभि बजंत घर घरन बार । ध्वज कनक पताका द्वार द्वार । १८५॥ औछाह राजमंदिर अनूप । १ बिद्धि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri