हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२ हम्मीररासो मंगल सुआल धरि एक अंस। बुध बारह वृश्चिक मैं प्रसंस ॥ घटि जीव एक अंसह सुसुद्ध । भृगु कन्या विद्या सुभग उद्दु ॥१८०॥ संसि मीन तीस कटि एक अंस । तिय राशि कह्यौ सुरभानुत्तंस ॥ सोइ कहे अंस चौबीस पूर । यह जन्म लग्न हम्मीर सूर ॥१८१॥ सुनि राव जैत मन हर्ष किन्न । भंडार अमित सब खोलि दिन्न ॥ गुरु बिप्र मंत्र मंत्री सु बोलि । बड़ भीर भइय नृप आय पौलि ॥१८२॥ किय स्राद्ध नंदि मुख बेद वृद्धि १ । सब जात कर्म किन्नौ सु सुद्धि ॥ गो भुम्मि अन्न कंचन सु दिन्न । द्विजराज सकल संतुष्ट किन्न ॥१८३॥ लिय बोलि सकल जाचक सु वृंद । हय हेम सुखासन दीन बंद ॥ बहु भूषन वाहन बिबिध रंग । जिहिं चाह लही सो दियौ संग ॥१८४॥ दधि दूब हरद भरि कनक थाल । बहु गाँन करत प्रबिसंत बाल ॥ दुंदुभि बजंत घर घरन बार । ध्वज कनक पताका द्वार द्वार । १८५॥ औछाह राजमंदिर अनूप । १ बिद्धि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri