हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासा ३३ आनंदमग्न नर नारि भूप ॥ सब दाँन देत घर घर उछाह। सब भय अजाचि जाचत सु ताह ॥१८६॥ बहु मंगल गावत अति अनूप । जय जयति कहत चहुवाँन भूप ॥१८७॥ वचनिका राव जैत कै गढ़ रणथंभवर तहाँ जैत घर हम्मीर जन्म्यौ संबत ११४१ साकौ १००६ दक्षणायन सरद ऋतु कार्तिक सुक्ला १२ द्वादसी रविवार घटी ३२ उत्तरा भाद्रपद घटी ६ पल ५६ । कछु घर को घरचौ पायौ । एक सेवक लोह पत्र पाथर सों घस्यौ तहाँ लोह सोनो ( सुवर्ण ) भयौ राव जैत कौं आणि दयौ ब्याघात योग घटी १६ पं० बालव कर्ण घटी २८ इष्ट घटी २६ पल ५ दिनमाँन घटी २८ पल १६ रात्रिमाँन घटी ३१ पल ४४ तुला संक्रांति गतांस १७ भोगांडस १३ चंद्रमा मीन को ११ अंस मंगल कन्या को १ अंस बुध वृस्चिक को १२ अंस वृहस्पति कुंभ को १ अंस सुक्र कन्या को १४ अंस सनि मीन को २६ अंस राहु कन्या को २४ अंस राव हम्मीर असी घड़ी जन्म लियौ । सब को मनोरथ पूर्ण कियौ । सर्ब वंस मैं हर्ष हुवो और अजमेर चित्तोड़ जु बोलि बिप्र पोष्या जाचक संतोख्या १ मंगल गाए बधावा २ बजाया ॥ ——— १ सरबस मैं (सर्वस्व मैं) दान दीन्हौं जग जस लीन्हौं । २ भए मन भाए। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri