भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 121, कुल 258 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 121

हम्मीररासो ३५ चले हयदलं पयदलं सत्थ रक्थं¹ । किते स्वाँन चीता मृगं संग जुध्थं ॥ चले साह गोसं सरोसं सुभाँनं । बजे नद्द नीसाँन नठन्नीन² चावं ॥१६४॥ उठी रेणु आकास छायौ सुहद्दं । मनो पावसं मेघ गज्जे सबद्दं³ ॥ चले तेज ताजी सुबाजी अपारं । सबै खाँन सुलतानं संगं जुझारं ॥१६५॥ करैं बीर लीला सुकीली⁴ बिधाँनं । धरैं बाँन कम्माँन संधाँन पाँनं ॥ लखे जीव जेते सु केते जिहाँनं । भ्रमै जंत्र तंत्रं सु पावै न जाँनं ॥१६६॥ बनै⁵ बेहरं गोत्र गंभीर नारी⁶ । बहैं नीर नद्दं सुभद्दं उन्हारी ॥ झरैं निज्झरं⁷ नाद भारी असारं⁸ । रहे फूलि संकूल बृक्षं अपारं ॥१६७॥ जहाँ अंब नीबू भए और केलं । सबै बृच्छ⁹ फुल्ले फले भार मेलं ॥ भरी भार साखा¹⁰ रही भुम्मि लग्गी । लता संकुलं पाद पंतैं उमग्गी ॥१९८॥ भ्रमै भृंग पुंजं सुगुंजं अपारं । मिली बेलि केती महीरूह¹¹ डारं ॥ मनौं मार अप्पार ताँने बिताँनं । १ हत्थं । २ वानै सुचावं । ३ सुमंद्दं, सुसद्दं । ४ सकेली । ५ बनं । ६ भारी । ७ नीझरं, निर्झरं । ८ पहारं । ६ बृक्ष फूले । १० सारं । ११ महीरोह । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri